‘वो’ कहाँ है? – एक अंतहीन खोज?
धर्मों का उत्तर – ‘वो’ एक अवस्थित है बैकुंठ में, स्वर्ग में, अर्श पर, सर्वत्र, घट-घट में।
विज्ञान के उद्भव ने धर्मों का एकाधिकार समाप्त कर, इस उत्तर पर अनेकों प्रश्न-चिन्ह लगा दिये-
· ‘एक’ शुद्धता का प्रतीक है तो फिर प्रकृति में प्रचुर विविधता का क्या स्रोत है?
· अरबों प्रकाश-वर्ष की दूरियों तक कहीं स्वर्ग का अस्तित्व नहीं, तो ‘वो’ कहाँ है?
· सर्वत्र है तो स्वरूप क्या है? अरूपी है तो जगत को रूप कैसे मिला?
विज्ञान का उत्तर – शून्य- ‘बिग-बैंग’। प्रकृति स्वचलित है- नियमबद्ध। ‘वो’ है ही नहीं ढूंढोगे कहाँ?
मानव-जिज्ञासा के चलते विज्ञान का ये उत्तर भी प्रश्नों के परे नहीं-
· अनंत-सम ऊर्जा का विस्फोट, शून्य-सम विस्तार से? स्वयं में अविश्वशनीय!
· जगत का विस्तार हो रहा है तो क्या सीमापार नितांत निर्वात है?
· क्या भौतिकी के नियम अनंत निर्वात में सीमित पदार्थ की उपस्थिती को मान्यता देते हैं?
लेखक के मन्तव्य से, उत्तर सन्निकट ही है, चाहिए तीसरी, तिरछी और तीक्ष्ण नज़र - ३त दृष्टि।
उत्तर एक में नहीं, शून्य में भी नहीं। इस द्विअंक के द्वंद का समाधान है... जानने के लिए पढ़िये-
‘वो’ कहाँ है?
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners