बाखर और चाँद

deep.nema2
फंतासी
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बाखर और चाँद

आंखे तो दो ही होती है ,लेकिन सपने या ख्वाहिशें एक या दो नहीं होते. कल्पनाओं के संसार एक या दो नहीं होते ।

हो सकता है आपको ये कहानी रोमांचक न लगे, कहानी कहूँ या कहानियाँ पता नहीं।

वो कागज की नाव मे भी तैरना जानता था , उसे दीवारों मे घास के लंबे मैदान दिखते थे जहां वो सुदूर तक पैदल घूमकर आना चाहता था ,उसे रात नाम की लंबी सूनी सड़क पर तारे बीनकर रखना अच्छा लगता था, वो जानता था की ये सब सर्फ से बने बुलबुलों जैसा है। लेकिन वो इन बुलबुलों के अंदर बैठकर आसमान की सैर करना चाहता था, ऐसी हजार ख्वाहिशों के बीच वो कहीं फंस सा जाता था।


मोटू की अपनी ही दुनिया थी जो उसके खुद के लिए काफ़ी रोमांचक थी, उस वखत उसकी उम्र महज़ 14 साल करीब थी, मध्यम-वर्गीय बेहद धार्मिक परिवार मे वो पैदा हुआ था। वो घर का बड़ा बेटा था उसके दो छोटे भाई भी थे, वो दिखने मे इतना मोटा नहीँ था लेकिन दोस्त

उसे प्यार से मोटू और न जाने किन-किन नामों से पुकारा करते थे।

उसे अपने सहस्त्र नामों जैसे भैंसा, कद्दू, गैंडा, फुटबॉल में से सिर्फ़ मोटू ही पसंद था। घर परिवार से लेकर स्कूल और स्कूल से ट्यूशन तक दहशत का माहौल था कब कौन कहाँ से आएगा और उसके गाल पर तमाचा जमाकर चला जाएगा पता नहीं चलता था ।

उसे घरों मे झगड़े बिल्कुल पसंद नहीं थे, माँ और बड़ी मम्मी मे किसी कारण बात नहीं होती थी तो अपनी तरह से सुलझाने की कोशिश करता था। दोनों से जाकर एक दूसरे के बारे मे कह देता की वो एक दूसरे को बहुत प्यार करती हैं, कभी यूं ही कह देता की माँ तुम्हें बड़ी मम्मी बुला रही हैं ताकि उनमे बातें शुरू हो, कभी-कभी जब वो माँ के साथ कपड़े धुलवाते मे पानी भरते हुए फिसल जाता तो इस पर सबको हँसता देख वो ये सोचकर खुश हो जाता की कम से कम सब हंस तो रहे हैं।

वो पिता के साथ काम पर जाता, घर मे माँ के साथ हाथ बँटाता पानी भरना, गोबर लाना, झाड़ू-पोंछा, बर्तन साफ़ करने में मदद करता। उसे संगीत बेहद पसंद था खास तौर पर ताल से बहुत जुड़ाव था। आसपास घट रही घटनाओं के समय उसके दिमाग में बैक ग्राउन्ड में ताल बजने लगती। वो अपनी माँ और पिताजी से बहुत प्यार करता था लेकिन उन पर गुस्सा भी आता था। पिताजी पर गुस्सा और प्यार दोनों ही ज़ाहिर करना बेहद चुनौती वाला काम था, पिताजी का गुस्सा खतरनाक था, अक्सर जब पिताजी काम से लौटकर घर खाना खाने आते तो मम्मी उनसे आते ही शिकायत कह देतीं " इसकी मेडम कह रही थीं स्कूल मे ये लगातार टेस्ट मे फेल हो रहा है"। वो सोचता ज़रा खाना तो खाना तो खाने देतीं पिताजी को, भूखे पेट ही शिकायत कर दी और उनका खून खौल जाता फिर क्या था, धूम ताना ता धूम ताल बजने लगती, लेकिन माँ भी खुद फंस जाती थी। ऐसे उसको पिटता देख वो भी खूब रोतीं उसे बचाने की कोशिश करतीं, पिताजी के जाने के बाद वो उसे दुलार करते हुए कहती "बेटा पापा इतनी मेहनत से पैसा कमाते हैं पढ़ाई पर ध्यान दिया करो" मोटू माँ को हैरानी से देखते हुए कहता " तो ऐसे ही प्यार से मुझे समझाती देतीं, पापा से क्यों बोला" माँ ये कहकर अपने काम पर लग जाती "तो क्या हुआ अपने पापा ही तो हैं"

मोटू को लगता कि दुनिया मे स्कूल से लेकर घर तक सब अपने ही तो है, जो ज़रा-ज़रा बात पर तड़ाक-तड़ाक जमाकर अपनेपन की बारिश करते रहते हैं। इस अपनेपन पर उसने भाव विभोर होकर एक कविता लिखी ।

पापा अपने

धूम ताना धूम

मम्मी अपनी

धूम ताना धूम

चाचा अपने

धूम ताना धूम

टीचर अपने

धूम ताना धूम

लातें पड़तीं

धूम ताना धूम

झापड़ पड़ते

धूम ताना धूम । ।

मोटू ने अपनी यह कविता स्कूल मे सुनाई तो बच्चे खूब हँसे लेकिन टीचर ने धूम ताना धूम करते हुए ऐसी बेहूदा कविता लिखने पर लानत भेजी।

मोटू की इस कविता को आप अपनी मर्जी से आपके जीवन मे जो धूम ताना धूम है उससे जोड़के आगे बढ़ा सकते है ।


ये सब जानने की कभी किसी ने कोशिश नहीं की के मोटू को मैली गंदी दीवारे क्यों पसंद है, उन दीवारों मे वो क्या खोजता है ? उसे पुरानी इमारते क्यों पसंद है? उसे टूटी खिड़कियों से घंटों चाँद देखना क्यों पसंद है? ऐसी कल्पनाए जो वो माँ, टीचर या किसी दोस्त को सुनाना चाहता है लेकिन वो कभी कह नहीं पाया किसी से भी ये सोचकर की सभी उसका मज़ाक बनाएंगे । वैसे भी सभी उसे घुन्ना या घनचक्कर तो बोलते ही थे ।

जी हाँ उस मोटू को मैं बहुत अच्छे से जानता हूँ ,शायद मैं ही जानता हूँ, इन शब्दों के रथों पर बैठ कर मैं कई साल पीछे उसे ढूंढने निकला हूँ। उसी बाखर वाले मकान के धुंधले से मटमैले इतिहास की तरफ जिन दीवारों मे उसे घास के मैदान दिखते है, जहां वो मज़े से घूमने निकल जाता है, चाँद की रोशनी में उसे वो बाखर एक जहाज की तरह दिखती है। लेकिन एक भयानक चीख उसकी उस जादुई दुनिया को कंपित कर देती है, वो देखता है की बाखर मे एक आदमी ने अपनी बीवी को बहुत तेज लात मारी है और वो उसे बुरी तरह पीट रहा है ।

बाखर वाले मकान मे रोज़ ही भयानक झगड़े होते थे, अक्सर औरते लड़कियां बुरी तरह पिटती थीं

ये सब मोटू को बहुत विचलित करता था, मैं मोटू को जानता हूँ, मैंने उसकी बेचैनी को कई बार उसकी कल्पनाओ के साथ कैनवास पर उतारा है, गुलाबी सपने नीले पड़कर दम तोड़ देते है,

मैंने देखा है रौशनियों को पत्थर बनते हुए, चिड़ियों को स्थिर होते हुए जो कहीं नहीं उड़ पाती, मोटू अक्सर गहराती शाम के वक़्त कुछ इसी तरह की उधेड़बुन मे होता था ।


टूटी खिड़कियों में लटकता चाँद क्या हमेशा ही खूबसूरत होता है, बाखर वाले मकान में आसपास जो लड़किया बुरी तरह पिटती हैं उनकी चीखो से वो चाँद स्तब्ध सा तो नहीं ? मोटू चाहता है कि उस जहाज को वो समंदर के अंदर किसी ऐसी दुनिया मे ले जाए जहां सैकड़ों रंगीन मछलियाँ हो लेकिन फिर वो किसी अनोखे टापू को खोजना चाहता है जहां बाखर की लड़कियां और उसकी माँ दादी और खुद वो खुली हवा मे श्वास ले पाएं जी पाएं आजादी के साथ ।

लेखक

दीपक नेमा

भोपाल

9893326587

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