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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palडॉ. माधवी श्रीवास्तवा का जन्म उत्तर-प्रदेश राज्य के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल वाराणसी शहर में 15 अगस्त सन् 1975 में एक सुसंस्कृत परिवार में हुआ था । पिता श्री शशिकान्त श्रीवास्तव शाखा-प्रबंधक के रूप में बैंक से सेवानिवृत्त हुए। पिता कRead More...
डॉ. माधवी श्रीवास्तवा का जन्म उत्तर-प्रदेश राज्य के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल वाराणसी शहर में 15 अगस्त सन् 1975 में एक सुसंस्कृत परिवार में हुआ था । पिता श्री शशिकान्त श्रीवास्तव शाखा-प्रबंधक के रूप में बैंक से सेवानिवृत्त हुए। पिता के कार्य-क्षेत्र का स्थानान्तरण होने के कारण उन्होंने कई शहरों में अपनी शिक्षा ग्रहण की । लखनऊ, वाराणसी और प्रयाग इनकी शिक्षा का मुख्य स्थल रहा है। डी. पी गर्ल्स इंटर कॉलेज से सेकंडरी शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत देश के बहु चर्चित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूर्व स्नातक, स्नातकोत्तर और संस्कृत भाषा में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूतपूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्र श्रीवास्तव के निर्देशन में डी. फिल् की उपाधि ग्रहण की।
Read Less...अनूप...जिसके साथ कभी उसने बचपन में होली के रंगों को आकाश के चित्रपट पर बिखेरा था...दीवाली के दीयों से मीनारें बना कर शरारत के डंडों से उसे तोड़ा था...और पतंगों को विश्वास की डोर से बाँध
अनूप...जिसके साथ कभी उसने बचपन में होली के रंगों को आकाश के चित्रपट पर बिखेरा था...दीवाली के दीयों से मीनारें बना कर शरारत के डंडों से उसे तोड़ा था...और पतंगों को विश्वास की डोर से बाँध कर पक्षियों सी ऊँची उड़ान दी थी...
प्रेम एक सुंदर अनुभूति है। जो प्राकृतिक रूप से मनुष्यों के भीतर होता है। सर्वप्रथम हमें प्रेम अपनी माँ से होता है, माँ ही हमारे अंदर एक सच्चे और निश्चल प्रेम का बीज बोती है। युवा ह
प्रेम एक सुंदर अनुभूति है। जो प्राकृतिक रूप से मनुष्यों के भीतर होता है। सर्वप्रथम हमें प्रेम अपनी माँ से होता है, माँ ही हमारे अंदर एक सच्चे और निश्चल प्रेम का बीज बोती है। युवा होने के पश्चात यह प्रेम विकसित होकर स्त्री-पुरुष के मध्य होता है जो एक नवीन परिवार का सृजन करता है। इस प्रेम में काम, क्रोध, मोह और ईर्ष्या जैसे भाव भी होते है, परंतु यह सारे भाव नियंत्रित और मर्यादित होते है, जो प्रेम-भाव को एक सुंदर रूप और आकार देते हैं। परंतु जब यही भाव अनियंत्रित हो जाता है, व्यक्ति का जब अपने मन और अपनी क्रियाओं पर नियंत्रण नहीं होता, तब वह अपराध का रूप धारण कर लेता है और व्यक्ति आपराधिक प्रवृत्ति का हो जाता है। कुछ ऐसा ही मानसी के साथ होता है। मानसी, मानव और सारणी के संबंधों को समझ नहीं पाती और ईर्ष्या और क्रोध के वशीभूत होकर वह दो-दो हत्याएं कर बैठती है। वह यह नहीं जानती की प्रेम बलात नहीं हो सकता यह एक सहज अनुभूति है, जो अनायास ही दो लोगों के मध्य उत्पन्न होता है।
This story is written by Dr. Madhavi Srivastava in Hindi language. Very beautifully, the observation of a Sati has been reflected. Sati has to sacrifice herself for truth and justice. Sati is Shiva's shiva ... It has been shown in this story smoothly. The whole creation is mesmerizing itself.
This story is written by Dr. Madhavi Srivastava in Hindi language. Very beautifully, the observation of a Sati has been reflected. Sati has to sacrifice herself for truth and justice. Sati is Shiva's shiva ... It has been shown in this story smoothly. The whole creation is mesmerizing itself.
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