साबिर अली साबिर की रचनाएं संवेदना और शिल्प दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। संवेदना की बात करें तो साबिर अन्य अनेक सूफी-संत कवियों की तरह सच की तलाश में लगे हैं। सत्य का शोध
गुलामगिरी...
गुलामगिरी में 16 अध्याय हैं और यह किताब संवादात्मक शैली में लिखी गयी है। पुस्तक में धोंडीराव और जोतिबा एक दूसरे से बात चीत करते हैं। सवाल जवाब करते हैं और भारत के इ
यह किताब एक बहुत बड़ी बहस के डॉक्युमेंटेशन का अनूठा प्रयास है। इस सम्वेदन शील विषय पर संकलन कर्ता की अपनी दृष्टि काफी स्पष्ट दिखती है। चूँकि वे हिमाचल से बाहर के हैं, तो उन की सीमा
तीसरे संस्करण के बारे में दो शब्द
सुकेत रियासत के विद्रोह को लगातार पाठकों का सहयोग मिल रहा है। जितनी आशा थी उससे कहीं ज्यादा प्यार इस पुस्तक को मिला। 2021 सितंबर में इसका पहला
डॉ.ओमप्रकाश ग्रेवाल बदलाव के लिए प्रयासरत सक्रिय बुद्धिजीवी थे। हरियाणा के साहित्यिक-सांस्कृतिक परिवेश को उन्होंने गहरे से प्रभावित किया। रचनाकारों-संस्कृतिकर्मियों से हम
हरमन प्यारा जुझारी साथी, संवेदनशील शिक्षक, लड़ाकू नेता, सजग लेखक बुद्धिजीवि शख्सियत और लंबी चौड़ी कदकाट्ठी वाला योद्धा यों हमें छोड़ कर चला जाएगा इस बात का अनुमान 9 नवंबर की रात