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Arun Gupta

मैं, समाज का ही हिस्सा हूँ , मेरी कहानियां भी इसी समाज का हिस्सा हैं , कहीं पर आप किसी किरदार में हैं और कहीं मैं किसी किरदार में हूँ।  अब ये देखना है कि हम सही किरदार में हैं या सारी ज़िन्दगी विलेन का ही किरदार निभाएंगे। मध्यमवर्गीय परिवार में मैं पला बढ़ा , छोटे से शहर में सब सपने बनते देखे और बिखरते हुए भी देखे , समाज को खुद से लड़ते भी देखा और बनते हुए भी देखा।  इन ४० बसंत में मैंने कभी धूप को झुलसते देखा और कभी बारिश को राहत देते हुए देखा। हर उजाड़ को देखा और हर बदलाव को भी देखा, और यही सब मेरी कहानियों का भी हिस्सा बन गए और मेरी ज़िन्दगी का भी।  यहाँ से तो शुरुआत हुई है पर बदलाव आते रहेंगे और मैं आप से हमेशा रूबरू होता रहूँगा।

आपका

अरुण

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दिन प्रतिदिन

Books by अरुण गुप्ता

मेरी किताब, मेरी कहानियां सिर्फ मुझ तक सीमित नहीं हैं। ये समाज के हर उस व्यक्ति की कहानी हो सकती है जो हर रोज़ इन परिस्थितियों का हिस्सेदार होता है। समझने की बात बस इतनी भर सी ही है

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