হিন্দি

बोल मेरे खुदा !
By aryan in Poetry | পড়ার জন্য : 85 | পছন্দ: 1
क्या गलती हुई थी मुझसे ए मेरे खुदा, की उसका हाथ मेरे हाथ में थाम दिया । मेरी गलती को तोह एक पल में पहचान लिया, और उसकी क  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 03:56 PM
आँखें
By aryan in Poetry | পড়ার জন্য : 98 | পছন্দ: 1
जिनकी आँखोँ से आँखे मिला कर, हमें इश्क़ हो गया था। आज हम दोनो कि गल्तियों की वजह से, हम दोनो एक दूसरे से आँखे भी नही मिल  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 04:00 PM
नि:शब्द
By aryan in Poetry | পড়ার জন্য : 89 | পছন্দ: 1
क्या कहे तुम्हारी मोहब्बत ने ऐसे बर्बाद करा , कि ये शायर तोह कुछ कहने लायक ही नही बचा ।। कि ये शायर तोह कुछ कहने लायक   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 04:05 PM
गलत फैमियाँ
By aryan in Poetry | পড়ার জন্য : 95 | পছন্দ: 1
ना तुम थी गलत,  ना हम थे गलत।  बस बात बिगाड़ी है तोह, बिगाड़ी है गलत फैमियों ने। बिगाड़ी है गलत फैमियों ने।।   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 04:09 PM
समझ गये हम
By aryan in Poetry | পড়ার জন্য : 91 | পছন্দ: 1
हर पल उनकी याद सताती है, फिर इस दिल को याद दिलाती है, कि यही थी वोह जो किसी और के लिये तुझे रुलाती है।।  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 04:15 PM
Safar
By sonam kushwaha in Travel | পড়ার জন্য : 103 | পছন্দ: 1
Ek safar esa tha ki safar sa na rha.                               Hua bhut kuch ki khne ko kuch na rha.                      বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 05:02 PM
Maa
By udita Tripathi in Poetry | পড়ার জন্য : 93 | পছন্দ: 0
सोफे पर सोए थे, जो उठते बिस्तर हो तुम, तुम्हारी नींद बिगाड़े बिना, तुम्हारी चिंता की उसने, वो मां है। राह तुम्हारी जो   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 08:05 PM
~Unsaid Thoughts~
By shagufta Aleem in Poetry | পড়ার জন্য : 122 | পছন্দ: 0
Is it not strange? Staying awake the whole night just because you keep fighting with your emotions and you end up loosing everytime, Matlab zindagi itni khaufnak kyu hai? Kabhi lagtaa hai sab theek hai aur kabhi lagta hai jaisa kuch khoyaa sa hai humare beech,Aur ye ajeeb si guftagu Dil aur dimaag k  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 09:01 PM
प्यारी माँ
By Devesh in Poetry | পড়ার জন্য : 96 | পছন্দ: 1
माँ तो अनमोल रचना है आपके लिए कुछ लिखना है आपने ने तो नौ महीने मुझे पेट रखा है  चाहे मैं जीती लड़ाई करू माँ से  फिर   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 6,2020 10:57 PM
Ha Yehi Pyaar Hai!
By Yasir Khan in Poetry | পড়ার জন্য : 130 | পছন্দ: 0
Mere aane ki khabar sunn ke,tum sanjti sawarti hona,ha yehi pyaar hai. Jis din main na aahun,tum bechain ho jati hona,ha yehi pyaar hai. Mujhe dekh kar tum sharam se nazre jhuka leti hona,ha yehi pyaar hai. Sab mere khilaf rehte hai par tum mera saath deti hona,ha yehi pyaar hai. Mere bare me koi bu  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 7,2020 02:02 AM
True Love
By Chinkey Jain in Poetry | পড়ার জন্য : 137 | পছন্দ: 1
Khushnasib hu main ki wo mujhe pyar is kadar karta hai, khone se mujhko har pal man hi man me darta hai... Jab ata hai khyal mera to nindo se uth jata hai, yad mujhe pal pal karke wo apne ashk bahata hai, har pal sbko khush rakhkar apna dard chhupata hai, khushnasib hu.......... Bat jab ati h shadi   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 7,2020 09:10 AM
Dharti maa
By Prajna paramita dey in Poetry | পড়ার জন্য : 138 | পছন্দ: 1
धरती माता की प्रकोप ये मिट्टी नही ये धरती माँ है, इसके कर्ज़ में डूबा सारा जहाँ है l इस धरती की गोद में खेलकर बड़े हुए है  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 7,2020 11:27 AM
पहली मुलाकात
By DILIP CHAKRDHARI in Poetry | পড়ার জন্য : 104 | পছন্দ: 0
Ek din khusiyo ke ambar sa Wah kahi milan ko mujhse haan Hum odh prem ke chadar liye  pehli bar pahnawe me badlaw kiye Milan chaurahe par usse hui Nazare na hata paya me kahi Pehli bar hua tha kuch aisa Pasand bana kisi ka mujh jaisa Rimjhim barish ki fir shuruaat hui Hum bheegte khade rhe tab   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 7,2020 12:56 PM
बेजु़बां की पीडा़
By DILIP CHAKRDHARI in Poetry | পড়ার জন্য : 95 | পছন্দ: 0
लोगो में प्रकृति के लिए क्रूरता कहाँ से आयी, बेजु़बां की पीडा़ को उसने ही नहीं पायी। लोगो की करुणा समझ माँ ने अपनी म  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 7,2020 01:05 PM
मेरी पसंद वो चुन लाती थी....
By DILIP CHAKRDHARI in Poetry | পড়ার জন্য : 107 | পছন্দ: 0
शाम पहर समय पर मिलने , सज धज कर वो आती थी। हाथ पकड़ मेरा राहों में ,  गीत कुछ गुनगुनाती थी। बात हो गर बाज़ार जाने की,   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 7,2020 01:14 PM