समय की कद्र
By saurabh saroj in Poetry | পড়ার জন্য : 1,337 | পছন্দ: 0
चलो समय की कद्र करें हम, जीवन सफल बनाना है तो। निज पथ पर हम बढ़ते जाए, मंजिल को यदि पाना है तो।।           समय सभी क  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 23,2020 08:38 AM
आपकी सोच- मेरी पहचान: मेरे पापा
By Ankita Kumari in Poetry | পড়ার জন্য : 1,336 | পছন্দ: 0
शब्दों का खेल ही खेला है सोचा कि शब्दों से ही जज़्बात हैं। बिन बोले आज सीख गए जब बदले ये हालात हैं। काम करना तो आता था   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 1,2020 09:58 PM
LIVING GHOST
By Amitesh Kumar in Thriller | পড়ার জন্য : 1,335 | পছন্দ: 1
"Youth Martial Arts Club" was a martial arts training club in the suburbs of Bihar.Students from different colleges and schools used to train over there. There was a famous group of martial arts students.A group of five students: Amit,Atish,Sambhu,Rakesh and Shanker.These five were outstanding in Ma  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 5,2020 06:51 PM
सियासत
By Abhinay Singh Rao in Poetry | পড়ার জন্য : 1,335 | পছন্দ: 1
सियासत की ही महाभारत थी सियासत की ही महाभारत है बस इतना हमारा भारत है।। क्या बस इतना हमारा भारत है? यहाँ लड़ाई ही सि  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 26,2020 01:03 AM
Leah
By Riya Das in General Literary | পড়ার জন্য : 1,334 | পছন্দ: 9
“And this?” Joe asked with a thick voice . “That will be fifty, sir” the man behind the glass counter said with an exhausted expression, adjusting the golden rimmed spectacles perched on his nose. He kept his eyes trailed on Joe, waiting for him to leave. “Come on   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 2,2020 02:57 PM
शिक्षा का गहना
By saurabh saroj in Poetry | পড়ার জন্য : 1,334 | পছন্দ: 0
1-शिक्षा है वह माध्यम, जिससे जीवन तार जुड़ती। शिक्षा ही है वह माध्यम, जिससे जीवन सार है मिलती।। शिक्षा ही है वह माध्य  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 30,2020 09:22 AM
माँ भारती जय भारती .- कविता
By DR. RAJESHWAR UNIYAL in Poetry | পড়ার জন্য : 1,333 | পছন্দ: 1
माँ भारती जय भारती .. बंधुओ, मैं अपने माँ भारती जय भारती.. नामक एक गीत रुपी पुष्प, जिसे उत्तराखंड मूल के मुंबईवासी लोक  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Aug 14,2020 11:37 PM
I couldn't see myself
By Surbhi Mayach in True Story | পড়ার জন্য : 1,328 | পছন্দ: 10
I couldn't see myself. Maybe I could. Maybe I did. But only through their eyes who could see nothing but the flaws in me. Some felt bad about having thick legs, while some hated themselves for the stick legs. Only if they knew that within it was all same, dealing with the same devils in a different   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 31,2020 12:27 PM
मी ही राजा असावं !
By pranoti gore in Poetry | পড়ার জন্য : 1,328 | পছন্দ: 0
   "★मी ही राजा असावं★" बुद्धिबळातल्या प्रत्येक प्याद्याला वाटत असावं आपणही राजाच असावं,असं गुलाम नसावं, युद्ध  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 2,2020 06:27 PM
उसकी हसीन वो राते
By Vikas khichar in Poetry | পড়ার জন্য : 1,326 | পছন্দ: 1
               *उसकी हसीन वो राते* कितनी हसीन होती है उसकी वो रात ...... जब होती है उससे दिल की वो बात॥ &nb  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 8,2020 06:01 PM
Truth or a myth
By Harshit Goyal (Lucifer) in Mythology | পড়ার জন্য : 1,323 | পছন্দ: 1
How does anybody know God is more moral than Satan? If it’s because the bible says so, then that is arbitrary and followers of the bible are just listening to God saying “I’m the good one, follow me.” If it’s due to observing actions and judging god’s actions to b  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে May 1,2020 10:43 PM
पता नहीं
By Aryan in Poetry | পড়ার জন্য : 1,322 | পছন্দ: 4
सब कहते हैं कि मैं ऐसा हूँ, सब कहते हैं कि मैं वैसा हूँ, पर क्यूँ, ये पता नहीं।   सब कहते हैं कि मैं ग़ुस्सैल हूँ, दुनिय  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jul 29,2020 07:46 AM
A Horrifying Dream with a bit FUN
By Harshit Goyal (Lucifer) in Horror | পড়ার জন্য : 1,321 | পছন্দ: 1
The following incident is of my real life and is taken from my book "JOURNEY WITH A DEMON" [It was a very pleasant and sunny day but suddenly cloud had surrounded all over the sky making the place dark and cloudy, suddenly some eerie sounds started to come which started horrifying me and it started  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 22,2020 06:37 PM
आसमान
By s.priya in Poetry | পড়ার জন্য : 1,319 | পছন্দ: 0
आसमान के भी अपने तेवर हैं,  हों भी क्यों न,  दिन में हल्के बादलों से  ढका,; रात को चाँद- सितारों से सजा| खूबसूरती की   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Mar 22,2020 08:07 PM
क्या हुआ?
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | পড়ার জন্য : 1,316 | পছন্দ: 0
क्या हुआ गर कोई तेरे साथ नहीं? क्या हुआ गर मंज़िल अभी पास नहीं? अकेले हीं निकले थे इस मार्ग पर कठिनाइयों से घबराते हो   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 12,2020 02:51 PM