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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Pal#‘‘स्तुति तो वह करने से रही?’’ इसलिए उसने वही पुराना राग- “हिंदू देवी और देवताओं को कोसने का मन बना लिया।” विचार के जेहन मेें उतरते ही गौतमी ने उस पर अमल कर दिया। उन्
हे बेमतलब ही गरियाने वाली थी कि विद्यु युत गति से एक दू सरा विचार उसके मन मेें कौंधा। शायद आज भगवान को भी गाली सुनने का मन नही था या फिर उसकी अपनी आत्मा अपने परमात्मा को और अधिक लज्जित होते नही देख पा रही थी। शायद इसी की प्रतिक्रिया स्वरूप यह विचार कौंधा हो...???
‘‘अह्म ब्रह्मास्मि’’ का विचार। वह खुद ही ब्रह्म है।’’
‘‘अह्म अल्लास्मि” का विचार। वह खुद ही खुदा है।’’
‘‘वह स्वयं मेें गॉड है, परमेश्वर ईशा मसीह है।’’
‘‘वह वाहे गुरू भी है और बुद्ध का अवतार गौतमी भी।’’
‘‘वह खुद ही अहुरा मज़दा है।’’
#अल्लाह की आस्था ने उसे विकलांग बना दिया था। मन से और तन से। फिर भी वह नही आया? एक विकलांग व्यक्ति की मदद को वह नही आया? वह तो उसके घमंड मेें पंगु बन गई थी।आस्था का ज्वार चढा था उस पर। विश्वास का चोगा पहनकर घर से निकली थी। अल्लाह की आभा की छतरी मेें चल
रही थी वह। फिर झुलसी क्यों? झुल सी क्या पूरा तन-मन ही जल गया। फिर धोखा क्यों? फिर आस्था पर वज्रपात क्यों? इकरा के मन मेें पैदा हुई हलचल अब सुनामी का रूप इख्तियार करती जा रही थी।
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डॉ. देवेेंद्र सिंह सोलंकी (अचिंत्यन) ने यूपीएससी द्वारा आयोजित चिकित्सा अधिकारी
होम्योपैथी की परीक्षा उत्तीर्ण की और दिल्ली सरकार मेें चिकित्साधिकारी के रूप मेें
सेवा देना शुरू किया, जो वर्तमान मेें सीएमओ (एनएफएसजी) के रूप मेें कार्यरत हैैं और लेखक बनकर खुश हैैं।
“सूपनखा के राम” और “मैैं फूल बन गया” के बाद यह उनकी तीसरी रचना है।
उनकी सबसे लोकप्रिय रचना “सूपनखा के राम” है, जो एक आध्यात्मिक उपन्यास
है, जबकि “मैैं फूल बन गया” कविताओं का संग्रह है।
“अह्म अल्लास्मि” एक मुस्लिम लड़की की कहानी है जो अल्लाह पर आँख मूंदकर विश्वास करती है और आखिर मेें उसे अल्लाह की शक्ति के बावजूद जीव की शक्ति का एहसास होता है। वह रूबरू होती है अंतर्मन मेें बसी शक्ति से। साथ मेें गाँव की एक हिन्दूू लड़की की कहानी जो निचली जाति चमार, अछूत जाति से संबंधित है, जिसे बचपन मेें पुजारी ने बहुत सताया था, जो अपनी युवावस्था मेें राज्य की प्रमुख, मुख्यमंत्री बन जाती है। वह हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों, मिथकों, भगवान और देवी आदि से दिल से नफरत करती है। साथ ही एक ऐसे व्यक्ति की कहानी
समानांतर चल रही होती है जो अपनी पत्नी की शांति के लिए जिहाद मेें भाग लेने के लिए कटिबद्ध है परन्तु अंत मेें मक्तब के मौलवी से उसे धोखा मिलता है। वह भी एक कट्टर मुसलमान था और अल्लाह को मानता था परन्तु प्रतिकूल परिस्थितियों के झंझावातों मेें उसने जाना कि वह जो कर सकता है ‘वह वही कर सकता है’ कोई आसमानी ताकत नहीं। जो भी करेगा, अल्लाह नहीं, वह करेगा। इसलिए वह कहता है कि उसके अन्तर्मन मेें, उसकी शक्ति के
रूप मेें अल्लाह है, अन्यंत्र कहीं नहीं इसलिए “अह्म अल्लास्मि”चरितार्थ है।
अचिन्त्यन अपनी पत्नी कल्पना पुत्री देवयानी और पुत्र अयोनिज के साथ दिल्ली मेें रहते हैैं।
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