अजीज से अतीत तक
यह पुस्तक जिसके शीर्षक से ही आपको मालूम होता कि इसमें अज़ीज़ों की अतीत बनें तक की यात्रा का ही जिक्र होगा और हाँ आप सही हैं।
'पुस्तक कवि का अर पुत्र होने की क्षमता रखती हैं।
इस पुस्तक में आपको लेखक के कुछ अजीज जो धरती माँ की गोद में ज्यादा दिन तो न रह पाये । पुस्तक में कहानी है उस लड़की की जिसनें यौवन की चादर भी न ओढ़ी थी मनचाहा प्रेम न मिला तो वह अपने परिवार के बारे में बिना
कुछ सोचे ही जीवन के रंगमंच से ही त्यागपत्र दे दी ।
कहानी है उसके उस काका की जिन पर कुसंगति अपना ढेर इस तरह डाल गई मानों उसका वह जन्मसिद्ध अधिकार रहा होगा । कहानी है उसके उस काका की जिनकी देह को बिनप्राण उन्होनें सड़क पर पाया हो और कहानी है उसके
उस्न काका की जिल्होनें उसे देश की राजधानी जैसे बढ़े शहरों में चलना सिखाया । उसके उठें से पहले सुबह की चाय का प्याला जो अकसर उसके आँखों तले रख दिया करते थे। और अक्सर उसके बदन के चिथड़ों को धोते, उन्हें खी
भी कर दिया करते थे।
कहानी उसके उस ताई की जिन्होनें उसे ढेर सारा प्यार, दुलार दिया । घरों में अनबन होने के बाद भी जिस तरह उसके लिए सब घरों के मायनें एक ही थे उसी तरह सब बच्चों के लिये ताई का स्वभाव भी एक सा ही था।
और कहानी उस परिवार की जिसमें खुशी के अंकुर कभी फूटे ही नहीं । खुशी तो खैर उस परिवार के पास दूर-दूर तक भी नजर न आती थी।
बीते वो लमहें जिनको बीतना ही था।
काल से टकराये थे।
हमें हारा और ,
काल को तो जीतना ही था।
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners