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Akhri Khat / आखिरी खत जो तुम तक कभी पहुंचे ही नहीं।

Author Name: Poorvi | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

हम सबके भीतर अनकहे खतों का एक कब्रिस्तान होता है—वे शब्द जो बोलने के लिए बहुत भारी थे और भूलने के लिए बहुत गहरे।
'आख़िरी ख़त' (Akhri Khat) 56 द्विभाषी कविताओं का एक ऐसा संग्रह है, जो उन खामोश घंटों में लिखी गई हैं जब दिल सबसे ज़्यादा ईमानदार होता है। यह एक ऐसी आत्मा का सफ़र है जो उस दुनिया में सुकून तलाश रही है जो कभी ठहरती नहीं। हिंदी-उर्दू की नज़ाकत से लेकर अंग्रेजी की बेबाकी तक, ये पन्ने उन ख्वाब देखने वालों के लिए हैं जो अपने जख्मों में खूबसूरती ढूंढते हैं।
यह सिर्फ एक किताब नहीं है; यह उस दिल की आखिरी सांस है जिसने आखिरकार अपनी आवाज ढूंढ ली है। इसे पढ़िए, और शायद आपको वह खत मिल जाए जिसे लिखने की हिम्मत आप कभी नहीं जुटा पाए।

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5 out of 5 (1 ratings) | Write a review
patttnaik1982

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★★★★★
Book describes about internal feelings of person with very soothing themes and it's a must read book for any age group.

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पूर्वी

"पूर्वी पटनायक अनकही बातों को लफ्जों में पिरोने वाली एक लेखिका हैं। खामोशी के साये और चाँद की रोशनी में लिखते हुए, वे भावनाओं और शब्दों के बीच एक ऐसा पुल बनाती हैं जो रूह को छू ले। उनका पहला संग्रह, 'आख़िरी ख़त', एक ऐसी आवाज़ का आगाज़ है जो साधारण होने से इनकार करती है। वे अपनी कविताओं की लकीरों के बीच रहती हैं, और हमेशा एक ऐसी कहानी के अंत की तलाश में रहती हैं जिसकी शुरुआत अभी हुई है।"

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