ये कहानी है अक्षरा नाम की एक लड़की की जो एक फिल्म के लिए हद से ज्यादा दीवानी हो चुकी है. उसे अपने आसपास के लोगों से ज्यादा उस फिल्म से मतलब है. इसका नतीजा ये होता है एक दिन वो अपने आप को उसी फिल्म में पाती है. उसके फिल्म में जाने से कहानी बदलने लगती है. क्या ये उसका कोई सपना था? क्या वो पागल हो गई थी? अगर उसने कहानी बदल दी थी तो क्या सभी के लिए वो बदल गई? क्या कोई है जो जानता है उसके साथ ये क्या हो रहा है? उसका अंत कैसा होगा? क्या फिल्म ख़त्म होने के बाद व