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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palक्या आपने कभी आईने के सामने ठहरकर उस शख्स से बात की है, जो दुनिया की भीड़ में कहीं खो गया है? 'अविरल मन' केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि शोर से सुकून की ओर एक मुसाफिर का सफर है। यह संग्रह लेखक के अंतर्मन के उन एकांत क्षणों की उपज है जहाँ 'अनकहा दर्द' शब्दों का जामा पहनकर कागज़ पर उतरा है।
मुख्य आकर्षण:-
साहित्य और सेवा का संगम: बिहार के सिवान की मिट्टी की सोंधी खुशबू और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की वर्दी के अनुशासन के बीच रची गई ये कविताएँ मानवीय संवेदनाओं के उन हिस्सों को छूती हैं जिन्हें हम अक्सर 'अनकहा दर्द' कहकर छोड़ देते हैं।
आत्म-साक्षात्कार की यात्रा: संग्रह की शुरुआत 'आईने के सम्मुख' से होती है, जहाँ इंसान दुनिया के मुखौटों को उतारकर अपनी असलियत से रूबरू होता है।
संघर्ष और निरंतरता: 'चल रे मनवा' जैसी पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि चाहे रास्ते में कितने ही पत्थर क्यों न हों, एक नदी की तरह हमें बस 'अविरल' बहते रहना है।
यथार्थ का चित्रण: 'तफ़्तीश' और 'बेसहारों की दुनियाँ' जैसी रचनाओं के माध्यम से लेखक ने सामाजिक विसंगतियों और गरीबी-अमीरी के फासलों को बड़ी ही बेबाकी से उकेरा है।
पाठकों के लिए: यह पुस्तक हर उस दिल के लिए है जो संघर्षों के बीच भी रुकना नहीं, बल्कि नदी की तरह बहना चाहता है। यदि इन कविताओं को पढ़ते हुए आपका थका हुआ मन फिर से 'अविरल' होकर चलने की हिम्मत जुटा सके, तो लेखक का यह सृजन सार्थक होगा।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.धर्मेश कुमार रवि
( लेखक परिचय )
धर्मेश कुमार रवि समकालीन हिंदी कविता के क्षेत्र में एक संवेदनशील और प्रखर हस्ताक्षर हैं। मूलतः बिहार के सिवान जिले (ग्राम+पोस्ट: कोइरीगावां, थाना: बड़हरिया) की मिट्टी से जुड़े धर्मेश के व्यक्तित्व में सादगी और विचारों में गाम्भीर्य का अनूठा समन्वय मिलता है।
इतिहास विषय में स्नातकोत्तर (MA) की शिक्षा प्राप्त करने के कारण उनकी दृष्टि काल के प्रवाह और मानवीय नियति को गहराई से समझती है। वर्तमान में वे सीमा सुरक्षा बल (BSF) में उप-निरीक्षक (Sub-Inspector) के पद पर कार्यरत रहकर राष्ट्र सेवा में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। अनुशासन की इस पृष्ठभूमि ने उनकी लेखनी को जहाँ एक ओर धैर्य प्रदान किया है, वहीं दूसरी ओर जीवन के उतार-चढ़ावों को 'अविरल मन' से देखने का नज़रिया भी दिया है।
उनकी कविताओं में 'अंतर्मन के संवाद' और 'आत्म-बोध' का वह स्पर्श मिलता है, जो पाठक को अपनी ही रूह के 'आईने' के सम्मुख खड़ा कर देता है। धर्मेश का मानना है कि कविता केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वह साधना है जो मनुष्य को संघर्षों के बीच भी 'चल रे मनवा' का मंत्र देकर निरंतर बहने की प्रेरणा देती है। राष्ट्र की सुरक्षा के साथ-साथ वे शब्दों के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं की सुरक्षा के प्रति भी उतने ही समर्पित हैं।
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