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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palपाँच कहानियों का ये कथा संग्रह पंचतत्व या यों कहें पंचामृत की तरह पाँच अलग-अलग तत्वों से बना है। प्रत्येक कहानी जीवन के अलग-अलग पहलुओं को रेखांकित करती है। कुछ घटनाएँ या पात्र इस कदर सार्वकालिक हो जाते हैं कि उसके एक विशेष पहलू से इतर पाठक का ध्यान जल्दी नहीं जाता है। इस संग्रह की प्रत्येक कहानी आपके मन के मिथक को बार-बार तोड़ेगी। हर कहानी कुछ अलग, कुछ नया संदेश देती है। यहाँ न केवल कथानक नए हैं बल्कि कहानी के द्वारा उठाए गए मुद्दे भी अलग हैं। एक सिपाही की मौत नए अंदाज में दिखेगी, पितृऋण की अदायगी भी एक अलग तरीके से होगी। कुछ ऐसे विषय हैं जिनपर ज्यादा न लिखना पोलिटिकली करेक्ट माना जाता है। ऐसे विषयों को छूकर लेखक ने एक तरह से खतरा भी मोल लिया है। लेकिन कहानी किसी अनछूए पहलू को उजागर न करे तो फिर वो एक घिसा-पिटा संदेश हो जाती है जो पाठक सदियों से कहानियों के माध्यम से सुनते आए हैं। इसलिए इस कथा संग्रह में आप बार-बार चमत्कृत होंगे और एक नई दृष्टि से अपने आस-पास के पात्रों का पुनरावलोकन कर पाएंगे।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.आलोक कुमार
जयरामपुर, भागलपुर में 1973 में जन्मे आलोक कुमार मूल रूप से तकनीकी सेवा में कार्यरत हैं। साहित्य के प्रति इनका रुझान बचपन से ही किस्से कहानियों के माध्यम से हुआ। कुछ बड़े हुए तो प्रेमचंद और दिनकर की रचनाओं की ओर इनका झुकाव थोड़ा ज्यादा हुआ। बाद में फणीश्वर नाथ रेणु जी के गंवईपन के मुरीद हो गए। बिहार के सुदूर गाँव से शुरू हुआ इनका सफर कस्बों व शहरों से होता हुआ महानगर तक पहुंचा। लेकिन गाँव में बिताए गए शुरुआती 18 वर्षों ने इनके मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ी है। इसलिए इनकी कहानियों में नायक कहीं न कहीं से गाँव से एक जुड़ाव महसूस करता है। भारत के विभिन्न भागों में नौकरी करने के दौरान इन्हें देश के अलग अलग हिस्सों की संस्कृति, उनके आचार-विचार को नजदीक से जानने व समझने का अवसर मिला। इससे इनके व्यक्तित्व में एक संपूर्णता आई। फलस्वरूप, वे प्रत्येक घटना के विभिन्न पहलुओं को अपनी सक्षम दृष्टि से देखने में कामयाब हुए। इसलिए इनकी कहानियों ने हमेशा समाज को एक अलग परिप्रेक्ष्य से देखने की कोशिश की है। वर्तमान में बीएचईएल हैदराबाद में कार्य करते हुए यहाँ से छपनेवाली पत्रिका ‘भेल यशस्वी’ के लिए लिखते रहे हैं। इसके अलावा हैदराबाद से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका ‘पुष्पक साहित्यिकी’ में भी इनकी कहानियाँ छपती रहती हैं।
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