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Hazaar Sapno wala Jeevan / हज़ार सपनों वाला जीवन मेरी यात्रा, मेरे संघर्ष, मेरी उड़ान/ Meri Yatra, Mere Sangharsh, Meri Udaan

Author Name: Dr. Mahendra Singh Goley | Format: Paperback | Genre : Biographies & Autobiographies | Other Details

यह पुस्तक उन सभी के लिए है—

जो टूटकर भी ईश्वर से प्रश्न नहीं करते,

बल्कि उसी मौन में उत्तर खोजते हैं।

जो संघर्ष को दंड नहीं,

आत्मा की दीक्षा मानते हैं।

जो प्रेम को अधिकार नहीं,

एक ऐसी करुणा समझते हैं

जो जीवन को चुपचाप जोड़ती चली जाती है।

यह पुस्तक उस क्षण की भी साक्षी है

जब एक नन्ही किलकारी—मायशा—

थके हुए जीवन में

फिर से प्राण फूँक देती है,

और उस प्रतीक्षा की भी,

जब एक अजन्मा अतिथि

अपनी मौन उपस्थिति से ही

पूरे अस्तित्व को पूर्ण कर देता है।

यह पुस्तक उनके लिए है

जिन्होंने बहुत सहा,

पर विश्वास को नहीं छोड़ा।

क्योंकि अंततः

ईश्वर उन्हीं को संतान, शांति और अर्थ देता है

जो हर मोड़ पर

समर्पण के साथ चलते रहते हैं।

-          डॉ महेंद्र सिंह गोले

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डॉ. महेन्द्र सिंह गोले

बचपन की मिट्टी की सौंधी खुशबू से लेकर इंजीनियरिंग की कठोर साधना, वैदिक वास्तु और ज्योतिष की गहन साधना, आध्यात्मिक चेतना और परिवार के निस्वार्थ प्रेम तक जीवन की हर राह ने डॉ. महेन्द्र सिंह गोले के व्यक्तित्व को अनुभव, अनुशासन और करुणा से तराशा है।

~ शैक्षणिक उपलब्धियाँ

- डिप्लोमा                   — सिविल इंजीनियरिंग (1987)

- स्नातकोत्तर डिग्री     — सिविल इंजीनियरिंग (2012)

- स्नातकोत्तर डिग्री     — ज्योतिष शास्त्र (2023)

- पीएच.डी.                   — वैदिक वास्तु (2024)

 

~ अनुभव की साधना

- 38+ वर्षों का समर्पित अनुभव; सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में

- 20+ वर्षों की सतत साधना; वैदिक वास्तु में, स्वाध्ययन, व्यवहारिक प्रयोग और जीवनानुभव के माध्यम से

- 15+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव; ज्योतिष शास्त्र में अध्ययन, मार्गदर्शन और अनुप्रयोग द्वारा ज्ञान की परंपरा

उनकी वैचारिक जड़ें स्वर्गीय पूज्य पिताजी श्री केशरी लाल आर्य (बाबूजी) द्वारा प्रदान किए गए ज्योतिष एवं हस्तरेखा के पारंपरिक ज्ञान से गहराई से जुड़ी रही हैं— जहाँ से संस्कार, विवेक और दृष्टि का विकास हुआ। ऑफिस की व्यस्तताएँ, कठिन पहाड़ी पोस्टिंग, परिवार के संघर्ष, रिश्तों की ऊष्मा, और सपनों की ऊँची उड़ान—इन सबको पूरी ईमानदारी से जीने के बाद यह आत्मकथा जन्म लेती है।

लेखक का दृढ़ विश्वास है—

“मेरा जीवन ईश्वर की लीला, पूज्य पितृ-स्मृति का आशीर्वाद और परिवार की अटूट शक्ति का एक सजीव, पवित्र संगम है।”

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