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Jab Pahad Ro Pade / जब पहाड़ रो पड़े पलायन की पीड़ा, पहाड़ की पुकार…

Author Name: DHIRENDRA SINGH BISHT | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

"जब पहाड़ रो पड़े" उत्तराखंड के उन गांवों की कहानी है, जो कभी जीवन से भरे हुए थे — जहां आंगन में मां पुकारती थी, पिता खेत जोतते थे, और बच्चे गलियों में दौड़ते थे। लेकिन आज, वहां सन्नाटा है। पलायन ने सिर्फ लोगों को नहीं छीना, उसने रिश्ते, संस्कृति और उम्मीद को भी साथ बहा दिया।

यह पुस्तक 20 अध्यायों में एक ऐसे सामाजिक और भावनात्मक यथार्थ को उजागर करती है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।
हर अध्याय एक गांव की तरह है — जहां दर्द है, स्मृति है, और शायद एक रास्ता भी जो वापसी की ओर जाता है।

लेखक धीरेंद्र सिंह बिष्ट की यह छठी पुस्तक है, और उनकी अब तक की सबसे संवेदनशील रचना मानी जा सकती है।
उनकी लेखनी में पहाड़ की मिट्टी की सादगी, लोक भाषा की मिठास और समाज की गहराई बसती है।

यह किताब केवल पढ़ने के लिए नहीं, लौटने के लिए है।

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धीरेंद्र सिंह बिष्ट

धीरेंद्र सिंह बिष्ट उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के बिंदुखत्ता क्षेत्र से संबंध रखते हैं।
वे एक संवेदनशील, विचारशील और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लेखक हैं, जिनकी लेखनी पाठकों को उनकी जड़ों, संस्कृति और आत्मिक प्रश्नों से जोड़ने का कार्य करती है।

धीरेंद्र जी का लेखन केवल भावनाओं को शब्दों में ढालना नहीं, बल्कि समाज की उन अनकही आवाज़ों को सामने लाना है जिन्हें अक्सर नजरअंदाज़ कर दिया जाता है।
उनकी शैली सरल, प्रभावशाली और हृदयस्पर्शी है — जिसमें पहाड़ की सादगी, रिश्तों की मिठास और ग्रामीण जीवन की सच्चाई स्पष्ट रूप से झलकती है।

अब तक उन्होंने छह पुस्तकें लिखी हैं:

 अग्निपथ – आत्मबल और संघर्ष की प्रेरक कहानियाँ
 मन की हार, ज़िंदगी की जीत – मानसिक संघर्षों और जीवन की विजय पर आधारित प्रेरक रचना
काठगोदाम की गर्मियाँ – पहाड़ी प्रेम कथा और मौन रिश्तों की भावुक अभिव्यक्ति
फोकटिया – एकतरफा रिश्तों की कटु सच्चाइयों पर आधारित मार्मिक उपन्यास
बर्फ़ के पीछे कोई था? – भीमताल की पृष्ठभूमि में गूंथी प्रेम, खोज और मौन संवादों से भरी कथा
जब पहाड़ रो पड़े – उत्तराखंड के पलायन से जूझते गांवों की सांस्कृतिक और भावनात्मक दास्तान
धीरेंद्र सिंह बिष्ट मानते हैं कि लेखन केवल साहित्यिक कर्म नहीं, एक ज़िम्मेदारी है —
अगर आपके शब्द किसी को सोचने, लौटने या भीतर से जागने को प्रेरित करें, तो वह लेखन सफल है।

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