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Kaathagodaam Ki Garmiyaan / काठगोदाम की गर्मियाँ जब शहर की लड़की पहाड़ों से टकराई…

Author Name: DHIRENDRA SINGH BISHT | Format: Hardcover | Genre : Literature & Fiction | Other Details

“काठगोदाम की गर्मियाँ” एक संवेदनशील प्रेम कथा है, जिसमें भावनाओं की गहराई, रिश्तों की उलझन और पहाड़ों की सादगी एक साथ बुनी गई है।

कनिका — एक तेज़ रफ्तार शहर से आई लड़की, और रोहन — शांत पहाड़ियों में जीता एक युवक। जब दोनों की दुनिया टकराती है, तो शुरू होती है एक अनकही यात्रा — जिसमें खामोशियाँ बोलती हैं, और अधूरे लम्हे एक मुकम्मल कहानी बन जाते हैं।

यह उपन्यास सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि आत्म-खोज, रिश्तों की परिभाषा और मौन संवादों का दस्तावेज़ है।

अगर आप उन कहानियों को पसंद करते हैं जो दिल को छू जाएं और पढ़ने के बाद भी साथ रहें — “काठगोदाम की गर्मियाँ” आपके लिए है।

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Hardcover

Ratings & Reviews

5 out of 5 (7 ratings) | Write a review
Nisha

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★★★★★
Nice book
मनोज सिंह मेहता (Pappu Mehta)

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★★★★★
Lovely 🌹
inspireburst342

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★★★★★
This book feels very natural to read, with a narrative that flows effortlessly.
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धीरेंद्र सिंह बिष्ट

धीरेंद्र सिंह बिष्ट उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले के बिंदुखत्ता क्षेत्र से हैं। लेखन के माध्यम से वह उन कहानियों को सामने लाते हैं, जो आम जीवन की छोटी-छोटी भावनाओं, रिश्तों और अनुभवों से जुड़ी होती हैं।

उनकी लेखनी में पहाड़ों की सादगी, खामोशी की गहराई और आत्मा से जुड़े संवादों की झलक मिलती है।

उनकी पहले की दो पुस्तकें — “अग्निपथ” और “मन की हार, ज़िंदगी की जीत” पाठकों के बीच काफी सराही गई हैं।
“काठगोदाम की गर्मियाँ” उनका तीसरा उपन्यास है, जो प्रेम, आत्म-खोज और रिश्तों की परतों को बेहद संवेदनशीलता से छूता है।

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