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Mukti – Deh ki Kaid / मुक्ति – देह की कैद जैविक दासता से परे | Beyond Biological Slavery

Author Name: Amar Singh | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

मुक्ति – देह की कैद
लेखक: अमर सिंह

मुक्ति – देह की कैद किसी संत या संन्यासी की कहानी नहीं है।
यह एक साधारण मनुष्य—अरुण—की यात्रा है, जो यह समझने लगता है कि उसकी सबसे बड़ी लड़ाई समाज या परिस्थितियों से नहीं, बल्कि अपने ही भीतर छिपी जैविक दासता से है।

बालकुंज के अनुशासित वातावरण से निकलकर जब अरुण शहर की दुनिया में प्रवेश करता है, तो इच्छाएँ, आकर्षण, महत्वाकांक्षा, प्रेम, ईर्ष्या और अहंकार उसके जीवन को आकार देने लगते हैं। वह सफलता पाता है, संबंध बनाता है, और फिर उसी के बीच एक गहरी रिक्तता महसूस करता है।
वह शांति चाहता है—मन से, विचारों से, जीवन से।

लेकिन एक असहज क्षण में उसे पहली बार यह बोध होता है कि उसकी इच्छाएँ और प्रतिक्रियाएँ शायद उसकी अपनी नहीं हैं, बल्कि शरीर और संस्कारों की गहरी प्रोग्रामिंग का परिणाम हैं। यहीं से उसकी समझ टूटती है—और एक नई खोज शुरू होती है।

यह उपन्यास शांति पाने की कहानी नहीं है।
यह उस भ्रम के टूटने की कथा है कि शांति कहीं बाहर मिल सकती है।

मुक्ति दमन या पलायन का मार्ग नहीं दिखाती, बल्कि यह संकेत देती है कि स्वतंत्रता तब शुरू होती है, जब मनुष्य अपनी प्रवृत्तियों को बिना दबाए, बिना पहचान बनाए देखना सीखता है।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो जीवन को केवल घटनाओं नहीं, बल्कि चेतना के स्तर पर समझना चाहते हैं।

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अमर सिंह

अमर सिंह एक विचारशील लेखक हैं, जिनकी रुचि मनुष्य की चेतना, मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों और जैविक कंडीशनिंग को समझने में है। उनका लेखन बाहरी घटनाओं से अधिक, भीतर चलने वाली प्रक्रियाओं पर केंद्रित है—जहाँ इच्छाएँ, प्रतिक्रियाएँ और पहचानें जन्म लेती हैं।

वे जीवन को किसी सिद्धांत या विश्वास प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष देखने और समझने की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। मुक्ति – देह की कैद उनका प्रथम उपन्यास है, जिसमें वे शांति, स्वतंत्रता और आत्मबोध से जुड़े प्रचलित भ्रमों को शांत लेकिन गहरे ढंग से प्रश्नांकित करते हैं।

अमर सिंह का लेखन उन पाठकों के लिए है जो जीवन को केवल सामाजिक या नैतिक ढाँचे में नहीं, बल्कि चेतना के स्तर पर समझना चाहते हैं।

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