परमाक्षरसूत्र निग्रह सम्प्रदाय का एक प्रमुख ग्रन्थ है जिसके रचयिता निग्रहाचार्य श्रीभागवतानंद गुरु हैं | इसमें कामाख्या देवी की कृपा के द्वारा प्राप्त दस परमाक्षर सूत्रों के ऊपर ज्ञानवतीटीका - सूत्रविस्तारभाष्य, हिंदी अनुवाद के साथ सम्मिलित किया गया है | यह ग्रन्थ ब्रह्म और जीव के रहस्यों को ५५ दृष्टिकोणों से परिभाषित करता है | इस संस्करण के सम्पादक आचार्य अरुण कुमार पाण्डेय हैं |