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Paschimi Adhunik aur Samkalin Murtikala / पश्चिमी आधुनिक और समकालीन मूर्तिकला

Author Name: Dr. Ganesh Kushwah | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

यह पुस्तक मूर्तिकला के छात्रों और कला प्रेमियों को, विशेष रूप से हिंदी भाषा में, पाश्चात्य आधुनिक और समकालीन मूर्तिकला का व्यापक ज्ञान प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस पुस्तक में मैंने दृश्य कला के क्षेत्र में एक मूर्तिकार के रूप में अभ्यास से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को सरल और प्रभावी भाषा में संकलित करने का प्रयास किया है।

इसमें मूर्तिकला की विकास यात्रा को पारंपरिक विधियों से लेकर 3D प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों तक प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, 19वीं और 20वीं शताब्दी के मूर्तिकला आंदोलनों जैसे इंप्रेशनिज़्म, क्यूबिज़्म, दादा, सुर्रियलिज़्म और एब्स्ट्रैक्ट एक्सप्रेशनिज़्म का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त, समकालीन कला रूपों जैसे इंस्टॉलेशन आर्ट, साइट-स्पेसिफिक आर्ट, परफॉर्मेंस आर्ट तथा नई मीडिया कला जैसी उभरती प्रवृत्तियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।

इसके अलावा, यह पुस्तक मूर्तिकला के क्षेत्र में व्यावसायिक संभावनाओं और एक पेशेवर मूर्तिकार के रूप में करियर निर्माण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को भी समाहित करती है, जिससे इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले पाठकों को मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। आशा है कि यह पुस्तक कला प्रेमियों और छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी सिद्ध होगी।
 
 
 

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डॉ. गनेश कुशवाह

डॉ. गणेश कुशवाह एक दृश्य कलाकार, कला समीक्षक, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और कला शिक्षक हैं। उन्होंने एम.एस. यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के ललित कला संकाय से मूर्तिकला में बी.एफ.ए. (2000) और एम.एफ.ए. (2002) की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 2024 में उन्हें राजा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय, ग्वालियर से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त हुई। उन्हें मूर्तिकला के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों का शैक्षणिक अनुभव है, साथ ही 3D डिजाइन प्रोडक्शन हाउस के साथ दो वर्षों का औद्योगिक अनुभव भी है। उन्होंने कई ललित कला संस्थानों और एनीमेशन कॉलेजों में कला एवं डिजाइन विषयों का अध्यापन किया है। उन्होंने 3D सॉफ्टवेयर और 3D प्रिंटिंग के क्षेत्र में भी व्यापक रूप से कार्य किया है।

वे “Art Instinct” नामक एक यूट्यूब चैनल संचालित करते हैं, जिसके माध्यम से वे अपनी कलात्मक साधना और कला संवाद को कला प्रेमियों के साथ साझा करते हैं। वर्तमान में वे डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के ललित कला संस्थान के मूर्तिकला विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।

कई समूह प्रदर्शनियों के अतिरिक्त, उन्होंने यूनाइटेड आर्ट फेयर, प्रगति मैदान, नई दिल्ली (2013) तथा जयपुर आर्ट समिट (2013 और 2014) जैसे प्रमुख कला आयोजनों में भाग लिया। वर्ष 2000 में उन्हें युवा कलाकारों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति प्राप्त हुई और 2022 में उन्हें सीसीआरटी (नई दिल्ली) द्वारा जूनियर फैलोशिप प्रदान की गई। उन्होंने कई राष्ट्रीय स्तर के कला शिविरों और संगोष्ठियों में भी भाग लिया है।

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