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Ratnmaargdarshika / रत्नमार्गदर्शिका ग्रह, मन, परंपरा और रत्न-विज्ञान की सरल, व्यावहारिक और संतुलित समझ / Grah, Mann, Parampara aur ratn-vigyaan kee saral, vyaavahaarik aur santulit samajh

Author Name: Naresh Singal & Nandita Singal | Format: Paperback | Genre : BODY, MIND & SPIRIT | Other Details

“रत्न केवल चमक नहीं, चेतना का संकेत हैं।”

क्या रत्न सच में जीवन बदलते हैं?
या वे केवल विश्वास, परंपरा और मनोविज्ञान का एक मिश्रण हैं?

रत्नमार्गदर्शिका आपको रत्नों की दुनिया को एक नई दृष्टि से देखने का निमंत्रण देती है। यह पुस्तक न तो अंधविश्वास को बढ़ावा देती है, और न ही परंपरा को नकारती है। बल्कि यह दोनों के बीच एक संतुलित, स्पष्ट और व्यावहारिक समझ प्रस्तुत करती है।

इस पुस्तक में आप जानेंगे:
• रत्नों का वास्तविक अर्थ और उनका इतिहास
• ग्रहों, मन और ऊर्जा के साथ उनका संबंध
• कौन-सा रत्न कब और क्यों उपयुक्त है
• सही रत्न चयन की समझ
• असली और नकली रत्नों की पहचान
• धारण-विधि, सावधानियाँ और आम भ्रांतियाँ

नरेश सिंगल के दशकों के अनुभव और अधिवक्ता नंदिता सिंगल की स्पष्ट, तर्कसंगत शैली इस पुस्तक को केवल जानकारी नहीं, बल्कि समझ का माध्यम बनाती है।

यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो रत्नों को केवल पहनना नहीं, बल्कि समझना चाहते हैं।

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नरेश सिंगल & नंदिता सिंगल

नरेश सिंगल

“जब प्रकृति की गहराइयों में जन्मे रत्न और मनुष्य के भीतर चल रही ऊर्जा एक लय में संवाद करते हैं, वहीं से जीवन को नई दिशा मिलती है।”

नरेश सिंगल भारतीय परंपरागत ज्ञान-परंपराओं—विशेष रूप से वास्तु, अंक तंत्र और ऊर्जा-विज्ञान—के गहन अध्येता और अनुभवी सलाहकार हैं। तीन दशकों से अधिक समय से वे जीवन, स्थान और चेतना के बीच के सूक्ष्म संबंधों का अध्ययन और मार्गदर्शन करते आ रहे हैं।

उन्होंने जटिल सिद्धांतों को सरल, व्यावहारिक और जीवन से जुड़ी भाषा में प्रस्तुत करने की एक विशिष्ट शैली विकसित की है। उनका दृष्टिकोण केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में संतुलन और स्पष्टता स्थापित करने पर केंद्रित है।

रत्नों के विषय में उनका दृष्टिकोण विशेष रूप से संतुलित है। वे रत्नों को केवल आभूषण या उपाय नहीं, बल्कि मनुष्य, ग्रहों और आंतरिक ऊर्जा के बीच एक सूक्ष्म सेतु के रूप में देखते हैं।

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