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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palभाषा के मुख्य रूप से चार अंग हैं- वर्ण, शब्द पद और वाक्य। भाषा की उस छोटी ध्वनि (इकाई) को वर्ण कहते है जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते है। इसमें वर्णमाला, वर्णों के भेद, उनके उच्चारण, प्रयोग तथा संधि पर विचार किया जाता है। इसमें शब्द-रचना, उनके भेद, शब्द-सम्पदा तथा उनके प्रयोग आदि पर विचार किया जाता है। पद विचार में पद-भेद, पद-रूपांतर तथा उनके प्रयोग आदि पर विचार होता है। कई शब्दों के मेल से वाक्य बनते हैं। ये शब्द मिलकर किसी अर्थ का ज्ञान कराते है- यह वाक्य विचार है । इनमें वाक्य व उसके अंग, पदबंध तथा विराम चिह्न आदि पर विचार किया जाता है। व्याकरण में इन सारी बातों पर चर्चा होती है । हिन्दी-व्याकरण संस्कृत व्याकरण से भिन्न है। कुछ अंशों में उस पर आधारित होते हुए भी वह अपनी स्वतंत्र विशेषताएँ रखता है।
इस पुस्तक में संपूर्ण व्याकरण को हिंदी की प्रकृति, प्रवृत्ति और प्रयोग के अनुरूप, छोटी-छोटी इकाइयों में विभाजित कर सुगम-सुबोध शैली में प्रस्तुत किया गया है । व्याकरण विषय के अलावा शब्द रचना, विलोम शब्द, मुहावरे आदि छात्रोपयोगी सामग्रि सम्मिलित हैं । यहाँ हिंदी के सभी व्याकरण के विभागों पर ईमानदारी से चर्चा करने का प्रयास किया गया है । इस पुस्तक को तैयार करते समय हिंदी के कई वरिष्ठ वैयाकरणविदों के ग्रंथों का अध्ययन कर उनसे मार्गदर्शन और जानकारी प्राप्त की गई है । अतः इन सभी प्रातःस्मरणीय व्याकरणविदों के प्रति मैं अपने को आभार मानता हूँ । आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है और हम अपनी उंगलियों के नोक पर सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.डॉ. एस. ए. मंजुनाथ
कर्नाटक के जिला हासन के श्रवणबेलगोला में जन्म । माता श्रीमति मायम्मा और पिता अंदानिगौडा। कर्नाटक के मैसूरु विश्वविद्यालय से बी.काम., एम.ए. और पी.एच-डी. उपाधियाँ प्राप्त। आगरा के केंद्रीय हिन्दी संस्थान से हिन्दी पारंगत और इलाहाबाद के साहित्य सम्मेलन से हिन्दी साहित्य रत्न प्राप्त किया । “नरेंद्र कोहली का व्यंग्य साहित्य : एक अध्ययन” विषय पर शोध कार्य संपन्न । तुलसीदास, कबीर और हिन्दी व्यंग्य साहित्य पर विशेष अध्ययन की रुचि। 1992 से 2005 तक कर्नाटक के द.क.जिला के सुल्या के नेहरू स्मारक महाविद्यालय में अध्यापन का कार्य । 2005 से 2015 तक कर्नाटक के द.क.जिला के पुत्तूर के संत फिलोमिना कॉलेज में अध्यापन कार्य करने के बाद वर्तमान में जिला मंगलूरु के पोंपै कॉलेज में 2015 से हिन्दी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं ।
’नरेंद्र कोहली का व्यंग्य साहित्य : एक अध्ययन’, ’हिन्दी के व्यंग्य सर्जक नरेंद्र कोहली’, ’हिन्दी व्यंग्य साहित्य : एक समीक्षात्मक अध्ययन’, और ’हिन्दी में व्यंग्य विमर्श एवं नरेंद्र कोहली’, विषय पर मौलिक ग्रंथ प्रकाशित हैं । ’मार्गदर्शी’, ’हिन्दी मंगला’, ’विहास वाहिनी’, ’विहास वाणी’, ’आधुनिक हिन्दी काव्य : एक अवलोकन’, ’विहास मंगला’, ’हिन्दी कहानी और वर्तमान समय’, पुस्तकों का संपादन कार्य संपनन्न किया है ।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशालाओं में लगभग 30 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत और प्रकाशित हुए हैं। हिन्दी स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से 25 वर्ष से हिन्दी प्रचार-प्रसार कार्य में सक्रिय हैं । लगभग 10 से ज्यादा राष्ट्रीय हिन्दी कार्यशाला एवं संगोष्ठियों का आयोन किया । वर्तमान में मंगलूरु विश्वविद्यालय हिन्दी अध्यापक संघ (विहास) मंगलूरु, कर्नाटक और कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय महाविद्यालय हिन्दी प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष हैं । मंगलूरु विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघ (अमुक्त) के उपाध्यक्ष के रूप कई अध्यापक संघटन में सक्रिय हैं।
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