मनजीत राजबीर जी के काव्य संग्रह'सुनो ना! महादेव' में आदि से अंत तक शिव ही शिव हैं। उनका यह काव्य संग्रह शिव को समर्पितहै। उनके जीवन के सुखों में- दुखों में ,जय में- पराजय में, हर्ष में- विषाद में ,सब के मूल में शिव हैं। इस संग्रह की रचनाओं में जीवन कीपीड़ा है ,मां की ममता है , रिश्तों की कड़वाहट है तो वर्तमान के प्रति छटपटाहट भी दिखाई देती है। अपने शंभु के प्रति कवयित्री का एकात्म प्रेम भाव है जिसमें वह डूब जाना चाहती हैं या कहें कि इन रचनाओं में मोक्ष क