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The Smiling Sketch / द स्माइलिंग स्केच Hindi Translation of the English Novel

Author Name: Sanjay Panwar | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

स्वेता देशमुख, एक मशहूर अभिनेत्री, अपने साथी और को-एक्टर राजवीर से बेइंतहा प्यार करती है। लेकिन उसकी जिंदगी तब तहस-नहस हो जाती है, जब वह राजवीर को किसी और औरत के साथ रंगे हाथों पकड़ लेती है। इस धोखे से टूट चुकी स्वेता और राजवीर के बीच एक ज़बरदस्त बहस होती है, जिसमें गुस्सा, दर्द और विश्वासघात की आग जल रही होती है। अगली सुबह, स्वेता की लाश संदिग्ध हालात में मिलती है। सवाल उठता है—क्या राजवीर और उसकी प्रेमिका ने मिलकर इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया? या कहानी में कोई और अंधेरा सच छिपा है? जिस कमरे में स्वेता का शव मिला, वहां बस एक ही सुराग था: एक मुस्कुराता हुआ स्केच, जो उसकी मौत के पीछे छुपी सच्चाई को उजागर कर सकता है।

‘द स्माइलिंग स्केच’ में हर चीज़ के पीछे एक गहरा रहस्य छुपा है। इंस्पेक्टर मयंक मिश्रा जैसे ही इस अनसुलझे राज़ की परतें खोलने में जुटते हैं, एक रहस्यमयी स्केच आर्टिस्ट का सामना करना पड़ता है, जिसकी अपनी जिंदगी में भी अनकहे राज़ छिपे हुए हैं। जैसे-जैसे मयंक सच्चाई के करीब पहुँचते हैं, अच्छाई और बुराई के बीच की लकीर धुंधली होती जाती है, और एक ऐसा खुलासा होता है जो आपके हर अंदाज़े को गलत साबित कर देगा।

इंस्पेक्टर मयंक मिश्रा के साथ इस दिमाग को झकझोर देने वाले सफर पर चलिए, जहाँ हर मोड़ पर भावनात्मक उथल-पुथल और रोमांचक ट्विस्ट आपका इंतजार कर रहे हैं। जानिए, कौन मासूमियत की आड़ में खेल रहा है और कौन अपने सबसे खौफनाक राज़ छुपाए बैठा है, जहाँ प्यार, धोखा और एक मुस्कान की ताकत आपको सन्न कर देगी।

क्या आप तैयार हैं उस स्केच के पीछे छुपे खतरनाक सच से रूबरू होने के लिए? ‘द स्माइलिंग स्केच’ उपन्यास पढ़ें, और एक ऐसी कहानी का अनुभव कीजिए जो आखिरी पन्ने तक आपको चौंकाती रहेगी।

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संजय पंवार

संजय पंवार, राजस्थान से आए एक प्रमुख क्राइम थ्रिलर लेखक, अपने उपन्यास में जटिल पात्रों के लिए जाने जाते हैं। उनकी रचनाएँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि अपराध की अंधेरी दुनिया में गहराई से प्रवेश करते हुए न्याय, नैतिकता और मानव सहनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पड़ताल करती हैं। मुख्या रूप से उनके उपन्यास अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित होते है परन्तु उनका मानना है कि हिंदी हमारे देश की आधिकारिक भाषा होने की वजह से यह हिंदी में भी उपलब्ध होनी चाहिए। इसलिए ये पुस्तक हिंदी में भी प्रकाशित की गयी। 

संजय की लेखन यात्रा आठ साल की उम्र में शुरू हुई, जब उन्होंने कहानियाँ और कविताएँ लिखीं। उन्होंने एक हाथ से बनी किताब भी बनाई। छोटी उम्र में कहानी कहने के प्रति उनके इस जुनून ने उन्हें एक सफल लेखक में तब्दील कर दिया, जो जटिल कथानकों, सस्पेंस, और नैतिक द्वंद्वों के साथ पाठकों को बांधने का हुनर रखते हैं।

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