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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palबड़ी कक्षा को पढ़ाते हुए मैंने अनुभव किया कि बच्चे पत्र लिखना भूल गए हैं. इसलिए एक बार बच्चों को कहा कि अपने माता या पिता को पत्र लिखे. जिसमे उनके त्याग, श्रम और आपकी परवाह का उल्लेख हो. फिर उसे अपने माता-पिता को दे दे.
दूसरे दिन छात्र-छात्राओं की प्रतिक्रिया अभूतपूर्व थी. उनका माता-पिता के प्रति और माता-पिता का उनके प्रति नजरिया बदल गया था.
आप किसी को 'धन्यवाद' कह कर देखिए. उसके किसी काम की प्रशंसा कर के देखिए. उसके चेहरे के भाव बदल जाएंगे. वहां पर आपको हसीन मुस्कुराहट दिखाई देने लगेगी.
पत्र यही करते हैं. उनमें लिखे- प्रशंसा, सराहना, किसी के त्याग को आपके द्वारा अभिव्यक्त कर देते हैं. इससे 'उन्हें' अपने होने का अच्छा एहसास होता है.
इसी एहसास की आप पत्र द्वारा दूसरे को खुशी दे सके, इसी प्रयास को गति देने के लिए पुस्तक में पत्र संकलित किए गए हैं. यह आपका पत्र तो नहीं हैं. पढ़ कर देखिएगा.
गीता क्षत्रिय
गीता क्षत्रिय
जन्म दिनांक- 13 सितम्बर 1960
प्रकाशित पुस्तक- ये आपका पत्र तो नहीं.
उपलब्धि- शिक्षा विभाग में 34 साल की गौरवपूर्ण सेवा.
पुरुस्कार- नेपाल में शिक्षा भूषण पुरस्कार, शिलांग में माननीय राज्यपाल द्वारा सम्मान प्राप्त.
पता- पोस्ट ऑफिस के पास, रतनगढ़ जिला-नीमच-458226 (मध्यप्रदेश) मोबाइल-07694079675 gopkshatriya@gmail.com
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