पुरूष पौरूषत्त्व खो रहा है, स्त्री का स्त्रीत्त्व माँ का ममत्त्व चट हो गया पिता का पितृत्त्व क्षीण हो चला राम लक्षण से भ्रातृत्त्व को मानने वाली संस्कृति भ्रात्तृहन्ता हो गई ।
स्त्री की लज्जा ने स्वच्छंदता का रूप ले लिया जिस देह को सूर्य-चन्द्र भी बमुश्किल देख पाते थे, उसे इंस्ट्रा जैसी साइट पर आम संभ्रांत महिलायें प्रदर्शित कर रही है । शील व संयम हवा हो गया है ।
आज सीता-सावित्री की संस्कृति में घर-घर रंभा मेनका बनने जा रही है ।