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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Pal……नवीन का नाम सुनते ही ऐसा लगा, मानो उसका पूरा बचपन फिर से सजीव हो उठा हो। बचपन की तमाम छोटी-बड़ी घटनाएँ उसके मस्तिष्क के चित्रपट पर उभरने लगीं। नवीन का मासूम और भोला चेहरा उसकी स्मृतियों में फिर से जीवंत हो गया…..
……आध्यात्मिकता दयालुता और करुणा के कार्यों से भी प्रकट होती है। जब कोई व्यक्ति किसी स्थानीय संस्था में सेवा करता है, तो उसे उद्देश्य और संतोष की अनुभूति होती है। दूसरों की सहायता करके वह मानवता के अर्थ और उसकी गहराई को समझता है और समुदाय में एकता की भावना को बढ़ावा देता है……
……कभी-कभी मनुष्य ऐसी स्थिति में फँस जाता है कि उसके जीवन के बीते हुए पल उसे किसी भी तरह से सामान्य रूप से जीने नहीं देते। वह उन पलों को लाख भुलाने का प्रयास करे, लेकिन वे स्मृतियाँ बार-बार उसके मन-मस्तिष्क पर हावी हो जाती हैं……
राज ऋषि शर्मा
राज ऋषि शर्मा हिंदी, डोगरी और अंग्रेजी भाषाओं के बहुमुखी प्रतिभाशाली लेखक, पत्रकार और चित्रकार हैं। उन्होंने अब तक विभिन्न विधाओं में 29 पुस्तकें लिखी हैं, जिन्हें पाठकों ने खूब सराहा है। वे मुख्य रूप से हिंदी में लिखते हैं। उनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और संग्रहों में प्रकाशित हुई हैं और आकाशवाणी पर भी प्रसारित की गई हैं।
1975 में उन्होंने 'महक' और 2022 में 'महकती वाटिका' नामक पत्रिकाओं का संपादन और प्रकाशन किया। 1977 में उन्होंने 'राजर्षि कल्चर क्लब' का भी संचालन किया। वर्तमान में, वे 'महकती वाटिका' नामक काव्य संग्रहों की श्रृंखला का संपादन और प्रकाशन कर रहे हैं।
राज ऋषि शर्मा को 'साहित्यालंकार' और 'साहित्य श्री' जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
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