"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
हिन्दी हमारी मातृभाषा तो जरूर बन गई है लेकिन हम लोग इस पर ध्यान कितना देते हैं वो देखने वाली बात है .... बाहर के देश... चीन हो या जापान ... जर्मनी...फ्राँस ... इटली.. आस्ट्रिया... रूस आदि जैसे देश अपनी भाषा में ही बात करते हैं चाहे किसी दुसरे देश के प्रतिनिधि से ही क्यों ना बात करनी हो...... लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं होता..... हम सबकी कोशिश होनी चाहिये की जितना हो सके हम हिन्दी का प्रसार करें... बहुत सुन्दर भाषा है हमारी.....
हमारे देश के तीन नामकरण हुए – भारत
लेखन एक ऐसी कला है जो हमें कलम के माध्यम से जीवन , समाज , प्रकृति इत्यादि से रूबरू कराती है। मैं स्वयं अपनी कलम के जरिये प्रत्येक वस्तु से जुड़ाव महसूस करती हूँ। कुछ लोगों का कहना है कि लेखक सिर्फ खुद के सुख दुख भाव ही लिखता है। लेकिन मेरा ऐसा मानना है की हम अपने आसपास जो देखते हैं , हमारे अन्दर वैसे ही भाव उमड़ते हैं। उन उमड़े जज्बातों को हम कोरे पन्नों पर शब्दों का रूप देते हैं। स्वतन्त्र