विदाई - एक पिता का दर्द
माँ की कोख में रही संतान नौ माह, लेकिन पिता के मस्तिष्क में रहती है ताउम्र। खासकर बात जब बेटियों की हो, तो देह पिता की होती है लेकिन दिल बनकर उसमें धड़कती हैं बेटियाँ। तभी तो विदाई का जो दर्द एक पिता को होता है वो शायद दुनिया में कोई दूसरा महसूस नहीं कर सकता। सोचिये कैसे जीता होगा वो शरीर जिसका हृदय ही किसी और को दे दिया जाए और शिथिल देह छोड़ दी जाए।
एक बेटी के पैदा होने के साथ ही बूँद बूँद सपने संजोता है एक पिता, उसक