इन्सानियत
By hanamant rajaram yadav in Poetry | वाचलं गेलेलं: 470 | लाइक: 0
जलती है तो जलने दो , वो जिंदा कहा है।... लाश ही तो है इन्सानियत , वो जिंदा कहा है।... कितने अरसे बीत गए,  एक लब्ज न देखा सा  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 4,2020 07:38 PM
मोहब्बत बदल गई( मधु)
By Ajahar Rahaman in Poetry | वाचलं गेलेलं: 469 | लाइक: 0
जो थी मोहब्बत ,अकीदत में बदल गई । तुझ से पहले मैं न करता था ; खुद की परवाह। जब से तुझे लबो से  लगाया मैनो । सुना था जो ,ल  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 8,2020 05:51 PM
फायदा उठाए कोरोना वाइरस का,
By bhawna gaur in Poetry | वाचलं गेलेलं: 469 | लाइक: 0
जी हाँ, इस महामारी , राष्ट्रीय आपदा कोरोना वाइरस संक्रमण के  चलते जो छुट्टी आपको  और हमको मिली है उनका फायदा उठाए.  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 13,2020 04:51 AM
कुछ कह नहीं पाते
By M Tasleem in Poetry | वाचलं गेलेलं: 466 | लाइक: 0
दिल में रख कर भी हम कुछ कह नहीं पाते क्या कहें उनसे सोच कर भी कह नहीं पाते वो जब मिलते हैं दिल धड़कता है सांस रुकती है ह  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Mar 29,2020 07:59 PM
ಏಕಾಂತ ಹಿತವೆನಿಸುತ್ತಿದೆ!
By Harish T H in Poetry | वाचलं गेलेलं: 466 | लाइक: 0
ಏಕಾಂತ ಹಿತವೆನಿಸುತ್ತಿದೆ  ಪ್ರಶಾಂತ ವಾತಾವರಣದಲ್ಲಿ ಕೂತಿರುವಾಗ. ಏಕಾಂಗಿ ನಾನಾಗಿರಲು ನಿನ್ನನ್ನೇ ನೆನೆದೆನು ನಿರ್ಸಗದ ಮಡಿಲಲ್ಲ  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 23,2020 01:07 PM
बोल मेरे खुदा !
By aryan in Poetry | वाचलं गेलेलं: 465 | लाइक: 1
क्या गलती हुई थी मुझसे ए मेरे खुदा, की उसका हाथ मेरे हाथ में थाम दिया । मेरी गलती को तोह एक पल में पहचान लिया, और उसकी क  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Jun 6,2020 03:56 PM
ஒரு தாயின் வலிகளோடு வரிகள்
By M.Sabeena Bahurudeen in Poetry | वाचलं गेलेलं: 465 | लाइक: 0
உந்தன் பொன்  முக சிரிப்பை காண எனது இரவெல்லாம் விடியல் ஆக்கினேன் ! எனது மடியிலும் நீ தவழ்ந்தாய் ! எந்தன் நேரத்த  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Jul 29,2020 09:04 PM
वो अगली सुबह
By Shreya Jain in General Literary | वाचलं गेलेलं: 462 | लाइक: 0
                                        वो अगली सुबहअगली सुबह अमन तो जागा लेकिन अम्मी नहीं। यह दास्त  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 7,2020 07:40 PM
मैं कुछ ऐसा कर जाऊँगा
By Ravi Ranjan in Poetry | वाचलं गेलेलं: 460 | लाइक: 0
उदासियों की वजह तो बहुत है जिंदगी में क्या करें.. गम भी बहुत दिये हैं जिंदगी ने हमें जो भी अजीज़ था वो सब छीना है हमसे अ  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 22,2020 02:45 PM
जब भारत में होगी क्रांति तब एशिया में होगी शांति।
By Master Tulsi Gyaan in Poetry | वाचलं गेलेलं: 460 | लाइक: 0
https://educational3012.blogspot.com/2020/06/blog-post.html?m=1 अधिक समय तक शांति चाहते हो तो नापाक देश पाकिस्तान में कर दो बेमिसाल 50 धमाके!* लगे ऐसा जैसे कि  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Jun 2,2020 09:13 PM
ಸೂರ್ಯನ ಅನಿಸಿಕೆ
By Surya kiran in Poetry | वाचलं गेलेलं: 457 | लाइक: 2
ಹೂವಿನಂತೆ ಅರಳಿದೆ ನೀನು ಈ ಧರೆಯಲ್ಲಿ...  ಯಾವ್ದೇ ಕೊಂಕಿಲ್ಲ ನಿನ್ನ ಚೆಲುವಿನಲ್ಲಿ...!!!  ಜೋಗದ ಸಿರಿಯಂತೆ ಹರಿದಾಡುವ ಆ ನಿನ್ನ ಕೇಶರಾ  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 23,2020 01:42 PM
||मेरे ख़्वाबों की तस्वीरों मे||
By Akanksha singh in Poetry | वाचलं गेलेलं: 457 | लाइक: 0
तेरे पास लोग बहुत है  क्या तुम मुझे उन लोगो से हटकर देखोगे, इस कदर न यूँ बातें कर जाओ मुझसे  डर लगता है कहीं मोहब्ब  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Jun 19,2020 04:18 PM
"आई "माझ्यासाठी
By Smita Chidrawar in Poetry | वाचलं गेलेलं: 453 | लाइक: 0
आई माझ्यासाठी आई असूदे की अम्मा अथवा असेल ती कोणाची ममा , पण असते ती खरंतर आपल्यासाठी प्रेमाचा निरंतर साठा ना कधीह  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 31,2020 12:30 PM
"ऐ चांद, ऐक गुज़ारिश हे तुमसे"
By Dolafz in Poetry | वाचलं गेलेलं: 446 | लाइक: 1
ऐ चांद, ऐक गुज़ारिश हे तुमसे ; गर मिले कहिं हमसफ़र मेरा बताना उसे : क्यों भटके गुमराह मंजिलो पे,  जबकि खदा महबूब तेरे  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 19,2020 11:44 PM
उधेड़बुन |
By Kaveri Nandan Chandra in Poetry | वाचलं गेलेलं: 395 | लाइक: 2
करवट करवट रात कटी,  परत परत जब खबर खुली,   दबे पाँव आये दुश्मन की,  दस्तक से मन में हूँक उठी |   हर तरफ थे पसरे सन्  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 20,2020 02:18 AM