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Swatantryottar Hindi Upanyas Saahity ke Vividh Vimarsh / स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी उपन्यास साहित्य के विविध विमर्श Swatantryottar Hindi Upanyas Saahity ke Vividh Vimarsh

Author Name: Dr.S.A.Manjunath | Format: Paperback | Genre : Letters & Essays | Other Details

उपन्यास हिंदी गद्य की एक आधुनिक विधा है । इस विधा का हिंदी में प्रादुर्भाव अंग्रेज़ी साहित्य के प्रभाव स्वरूप हुआ । भारत “आजादी का अमृत महोत्सव” पर्व मना रहा है । इस अमृतकाल में भारत की आजादी के पचहत्तर वर्ष के इस संदर्भ में ‘स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी उपन्यास साहित्य के विविध विमर्श’ विषय पर कई लेखकों का लेख संगृहीत कर एक पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने का एक सार्थक प्रयास मैंने किया है. संकलन तैयार करने के धुन में स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी उपन्यास साहित्य के विविध विमर्श पर प्रकाश डालते हुए लिखे गए लेख संग्रहीत हैं । स्वाधीनता के अमृत महोत्सव पावन पर्व पर यह संकलन आपके मन-मानस को स्वाधीनता के बाद सृजित औपन्यासिक साहित्य में वर्णित विमर्श की कई धाराओं विश्लेषण किए जाने की अमृत तृप्ति प्रदान करे। 

इस संकलन में संगृहीत लेख देश के विभिन्न प्रदेशों से प्राप्त हुई हैं । ज्ञानी रचनाकारों ने अपनी भावनाओं को शब्द रूप देकर महत्वपूर्ण लेख प्रदान करके इस साहित्यिक उपक्रम को समृद्ध बनाया । मेरे इस संपादन कार्य को आसान बनानेवाले इन सब बंधुओं को साधुवाद और शत-शत नमन । इन लेखों में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं, इससे संपादक का उनके विचारों से सहमत/असहमत होना अनिवार्य नहीं है । रचना की मौलिकता संबंधी किसी भी प्रकार के विवाद एवं चुनौती हेतु लेखक स्वयं उत्तरदायी रहेंगे । रचना चयन का अंतिम अधिकार संपादक के पास सुरक्षित है । आशा है सुधी पाठक और साहित्य प्रेमी मित्रों के साथ मिलकर किये गये मेरे इस प्रयास को सहर्ष स्वीकार करेंगे । 

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डॉ. एस. ए. मंजुनाथ

डॉ. एस. ए. मंजुनाथ

कर्नाटक के जिला हासन के श्रवणबेलगोला में जन्म । माता-पिता स्वं. श्रीमति मायम्मा और स्व. अंदानिगौडा । मैसूरु विश्वविद्यालय से बी. कॉम, एम.ए. और पी.एच-डी, आगरा के केंद्रीय हिन्दी संस्थान से हिन्दी पारंगत (बी.एड) और इलाहाबाद के साहित्य सम्मेलन से हिन्दी साहित्यरत्न प्राप्त ।  “नरेंद्र कोहली का व्यंग्य साहित्य: एक अध्ययन”  विषय पर शोध कार्य । 1992 से हिन्दी अध्यापन के कार्य में संलग्न और वर्तमानमें पोंपै कॉलेज, ऐकला, मंगलूरु में हिन्दी प्राध्यापक के रूप में सेवारत । “नरेंद्र कोहली का व्यंग्य साहित्य: एक अध्ययन”,  “हिन्दी के व्यंग्य सर्जक नरेंद्र कोहली”, “हिन्दी व्यंग्य साहित्य एक समीक्षात्मक अध्ययन”, “हिन्दी में व्यंग्य विमर्श एवं नरेंद्र कोहली”, “सुबोध हिन्दी व्याकरण”, “प्रयोजनमूलक हिन्दी”, “सरल हिन्दी व्याकरण और रचना”, और “नवीन हिन्दी व्याकरण”  विषय पर पुस्तक प्रकाशित हैं । “मार्गदर्शी”, “हिन्दी मंगला”, “विहास वाहिनी”, “विहास वाणी”, “आधुनिक हिन्दी काव्य: एक अवलोकन”,“विहास मंगला”, “हिन्दी कहानी और वर्तमान समय”, “अमृत काव्य धारा”, और “भारतीय संत साहित्य परंपरा” नामक पुस्तकों का संपादन कार्य संपन्न है । हिन्दी और कन्नड दोनों भाषाओ में “भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कृत साहित्यकार” नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है । भगवानदास मोरवालजी का एक चर्चित उपन्यास “शकुंतिका” का कन्नड भाषा में अनूदित और पुस्तक प्रकाशित है । कुल मिलाकर 25 पुस्तकें प्रकाशित हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में लगभग 50 शोध पत्रों की प्रस्तुति और प्रकाशित हैं । तीन पी.एच-डी और सात एम. फिल शोधकार्य में मार्गदर्शन । लगभग 15 राष्ट्रीय हिन्दी कार्यशाला एवं संगोष्ठियों का आयोजन । अखिल भारतीय हिन्दी महासभा के राष्ट्रीय सचिव  और शोध जर्नल के संपादक मंडल के सदस्य है । वर्तमान में कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय महाविद्यालय हिन्दी अध्यापक संघ, बेंगलूरु, कर्नाटक के अध्यक्ष, मंगलूरु विश्वविद्यालय कॉलेज अध्यापक संघ (अमुक्त) के उपाध्यक्ष और कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय कॉलेज अध्यापक संघ, बेंगलूरु के सह सचिव हैं । Email: manjuspc66@gmail.com. Cell: 9449546665 

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