Share this book with your friends

Dasha / दशा दशाओं में फँसा आदमी

Author Name: Mathura Kalauny | Format: Paperback | Genre : Music & Entertainment | Other Details

नाटककार मथुरा कलौनी की कलम से जीवन की भिन्न दशाओं एवं परिस्थितियों में फँसे मनुष्यों पर चार सशक्त लघु नाटकों का कोलाज है दशा।

लंगड़ - श्रीलाल शुक्ल के कालजयी उपन्यास रागदरबारी का पात्र लंगड़ एक ऐसे धर्म की लड़ाई में फँसा है जहाँ व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के नियम-कानून हैं। भ्रष्टाचार की आचारसंहिता है। नकलनबीस और लंगड़ के बीच का नैतिक द्वंद्व व्यवस्था में प्रच्छन्न भ्रष्टाचार पर स्पॉटलाइट है।

तू नहीं और सही - लिव-इन रिलेशनशि‍प की आड़ में रिश्तों की गहराई को तलाशती और जीवन से जूझती एक पूर्णतया भावनात्मक मोह-प्रलोभन से मुक्त नारी की व्यथा-कथा है।

चिराग का भूत –घरेलू चिंताओं में फँसे एक आम आदमी को अलादीन का चिराग मिलता तो है पर जिन्न से क्या माँगे के संशय में वह जिन्न को नून-तेल-लकड़ी के जाल में इतना उलझा देता है कि जो परिणाम होता है वह कल्पनातीत है।

कौन हो तुम बृहन्नला - बृहन्नला के प्रति उत्तरा की जिज्ञासा के माध्यम से  समाज के हाशिये पर खड़े किन्नरों की दशा में झाँकता हुआ नाटक।

Read More...
Paperback
Paperback 200

Inclusive of all taxes

Delivery

Item is available at

Enter pincode for exact delivery dates

Also Available On

मथुरा कलौनी

मथुरा कलौनी का जन्म 20 जनवरी 1947 को पिथौरागढ़ में तथा शिक्षा दीक्षा कोलकाता में हुई थी। उनकी पहाड़ में बीते बचपन की स्मृतियाँ इतनी बलवती हैं कि वहाँ की अनुभूतियाँ यदा-कदा उनकी रचनाओं में झाँकने लगती हैं। गंभीर से गंभीर विषय को हास्य-व्यंग्य का पुट देकर चुलबुले अंदाज में प्रस्तुत करने में वे सिद्धहस्त हैं। प्रेम, शृंगार, हास्य, व्यंग्य आदि सभी रसों के इंद्रधनुषी रंग उनकी अद्भुत वर्णनात्मक शैली में मुक्त तैरते रहते हैं। उनकी रचनाएँ बहुत पठनीय होती हैं। आभास ही नहीं होता कि भावनात्मक अनुभूतियों के आवेगों से गुजरते हुए कब कथानक के शीर्ष पर पहुँच गये। 

मथुरा कलौनी अपनी कृतियों में पात्रों के अनुपम चित्रण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने साहित्य की लगभग समस्त विधाओं में अपनी कलम चलाई है जिनमें उपन्यास, कहानी और नाटक प्रमुख हैं। उनकी रचनाओं में अप्रत्यक्ष, गुदगुदाने वाले हास्य की प्रधानता है। मानव संबंधों की विविधता का कदाचित ही कोई पक्ष उनकी लेखनी से अछूता रहा हो। प्रियदर्शी अशोक में एक कालजयी ऐतिहासिक विभूति का द्वंद्व हो, या कब होगी भेंट में अछूते प्रेम के भावनात्मक प्रसंग हों, धतूरे के बीज में काले-डरावने चरित्र हों या विषकन्या में अपराध जगत के गुमनाम रहस्यों का रोमांच हो, वहाँ से वापसी में स्मृति-लोप के कगार से वापसी की यात्रा हो या कौन हो तुम बृहन्नला में किन्नर वर्ग की अबूझ अनकही वेदना का चित्रण हो, सब इनकी लेखनी के चित्रफलक(कैनवास) में समाहित हैं।

मथुरा कलौनी ने चार दशक पहले साहित्यिक यात्रा आरंभ की थी। 1988 में बेंगलूरु में कलायन नाट्य संस्था की स्थापना की। 1999 में इन्टरनेट में कलायन पत्रिका (www.kalayan.org) का प्रकाशन आरंभ किया। आपकी लगभग डेढ़ सौ कहानियाँ प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। पिछले 34 सालों में आप इक्कीस नाटक और दर्जन से अधिक लघुनाटकों का लेखन और मंचन कर चुके हैं। आपके दस नाटक, चार लघु-उपन्यास और एक कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। दुबई में दो हिन्दी नाटकों के मंचन के साथ  कंबोडिया, बीजिंग, असम-मेघालय, राजस्थान और बाली में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलनों में नाट्यपाठ की प्रस्तुतियाँ खासी चर्चित रहीं।

संप्रति आइटीसी लिमिटेड में रिसर्च मैनेजर के पद से सेवानिवृति  के उपरांत  बेंगलुरु में नाटकों के लेखन और निर्देशन में सन्नद्ध हैं तथा कलायन नाट्य संस्था के संचालन व कलायन पत्रिका के संपादन और संचालन को समर्पित हैं।

संपर्कः  ईमेल- editor@kalayan.org   

वेबसाइट - www.mathurakalauny.com

Read More...

Achievements

+6 more
View All