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SAMAJIK MEDIA AUR HAM / सामाजिक मीडिया और हम Social media and us

Author Name: Ravindra Prabhat | Format: Paperback | Genre : Computers | Other Details
आज के दौर में बेहद ताकतवर माध्यम है सामाजिक मीडिया। एक ऐसा वर्चुअल वर्ल्ड, एक ऐसा विशाल नेटवर्क, जो इंटरनेट के माध्यम से आपको सारे संसार से जोड़े रखने में समर्थ है। द्रुत गति से सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक संचार का एक बहुत सशक्त माध्यम है सामाजिक मीडिया। यह मीडिया जिसे वैकल्पिक मीडिया भी कहा जाता है पारस्परिक संबंध के लिए अंतर्जाल या अन्य माध्यमों द्वारा निर्मित आभासी समूहों को संदर्भित करता है। यह व्यक्तियों और समुदायों के साझा, सहभागी बनाने का माध्यम है। इसका उपयोग सामाजिक संबंध के अलावा उपयोगकर्ता सामग्री के संशोधन के लिए उच्च पारस्परिक मंच बनाने के लिए मोबाइल और वेब आधारित प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के रूप में भी देखा जा सकता है। इस पुस्तक में लेखक ने सामाजिक मीडिया का समग्र मूल्यांकन कराते हुये सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को पाठकों के समक्ष रखा है। सामाजिक मीडिया को जानने-समझने का यह बेहद उपयोगी पुस्तक है, जिसमें लेखक ने कहा है कि दुनिया में दो तरह की सिविलाइजेशन का दौर शुरू हो चुका है, वर्चुअल और फिजीकल सिविलाइजेशन। आने वाले समय में जल्द ही दुनिया की आबादी से दो-तीन गुना अधिक आबादी इन्टरनेट पर होगी।
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रवीन्द्र प्रभात

डॉ रवीन्द्र प्रभात हिन्दी के मुख्य ब्लॉग विश्लेषक और सोशल मीडिया एक्सपर्ट हैं। इनकी हिन्दी साहित्य में सार्थक उपस्थिति के रूप में अनेकानेक उपलब्धियां हैं। देश-विदेश के लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में तथा दो दर्जन से अधिक सहयोगी संकलनों में उनकी 200 से ज्यादा रचनाएँ संकलित हैं। लगभग एक दर्जन से अधिक ग्रन्थों के वे सर्जक, संपादक तथा अनेक सम्मानों से विभूषित हिन्दी के लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकार हैं। साथ ही शोध, समीक्षा, व्यंग्य, कविता, गजल, निबंध, हाइकू तथा लघुकथा के विशिष्ट और अग्रणी हस्ताक्षर हैं। सुप्रसिद्ध समीक्षकों के द्वारा उनके अनेकानेक शोधात्मक, समीक्षात्मक आलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं। देश की अनेक संस्थाओं तथा पत्रिकाओं के वे संरक्षक हैं और अनेक राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ-ग्रन्थों, कोश ग्रन्थों, इतिहास ग्रन्थों में उनके परिचय प्रकाशित हुये हैं। विकिपीडिया पर 48 भाषाओं में उनके परिचय प्रकाशित हैं। इनके एक काव्य संग्रह ‘‘स्मृति शेष‘‘, दो गजल संग्रह क्रमशः ‘‘हमसफर‘‘ एवं ‘‘मत रोना रमजानी चाचा‘‘, पाँच उपन्यास क्रमशः ‘‘ताकि बचा रहे लोकतन्त्र‘‘, ‘‘प्रेम न हाट बिकाए‘‘, ‘‘धरती पकड़ निर्दलीय‘‘, ‘‘लखनौआ कक्का‘‘ और ‘‘कश्मीर 370 किलोमीटर‘‘ तीन संपादित पुस्तक क्रमशः ‘‘समकालीन नेपाली साहित्य‘‘, ‘‘हिन्दी ब्लॉगिंगः अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति‘‘ और ‘‘हिन्दी के विविध आयाम‘‘ (राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य मे) तथा एक हिन्दी ब्लॉगिंग पर आधारित आलोचना की पुस्तक ‘‘हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास‘‘ प्रकाशित है। उन्हें साहित्य एवं ब्लॉगिंग में उल्लेखनीय योगदान के लिए क्रमशः ‘‘ब्लॉगश्री‘‘, ‘‘ब्लॉग विभूषण‘‘ के साथ-साथ ‘‘संवाद सम्मान‘‘ (वर्ष 2009), ‘‘प्रबलेस हिन्दी चिट्ठाकारिता सम्मान‘‘ (वर्ष 2010), ‘‘बाबा नागार्जुन जन्मशती कथा सम्मान‘‘ (वर्ष 2011), ‘‘साहित्यश्री सम्मान‘‘ (वर्ष 2012) आदि सम्मानों से विभूषित और समादृत किया जा चुका है। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित डॉ सियाराम की शोध पुस्तक ‘‘रवीन्द्र प्रभात की परिकल्पना और ब्लॉग आलोचना कर्म‘‘ अभी हाल ही प्रकाशित हुआ है। लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक ‘‘जनसंदेश टाईम्स‘‘ और ‘‘डेली न्यूज एक्टिविस्ट‘‘ के नियमित स्तंभकार रह चुके हैं, व्यंग्य पर आधारित साप्ताहिक स्तंभ ‘‘चैबे जी की चैपाल‘‘ काफी लोकप्रिय रहा है। हिन्दी ब्लॉग आलोचना का सूत्रपात करने वाले तथा हिन्दी ब्लॉगिंग का इतिहास लिखने वाले वे पहले इतिहासकार हैं। वे ब्लॉग साहित्यिक पुरस्कार ‘‘परिकल्पना सम्मान‘‘ के संस्थापक, साहित्यिक संस्था ‘‘परिकल्पना‘‘ के ‘‘महासचिव‘‘ तथा मासिक पत्रिका ‘‘परिकल्पना समय‘‘www.parikalpnasamay.com के प्रधान संपादक हैं। संपर्कः प्रधान संपादकः परिकल्पना समय (हिन्दी मासिक), एस॰ एस॰ 107, सेक्टर-एन-1, संगम होटल के पीछे, अलीगंज, लखनऊ-226024 (उ.प्र.), मोबाइल नंबरः 09415272608 तथा ईमेल संपर्क-ravindra.prabhat@gmail.com
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