विश्व की लगभग 1% आबादी हकलाने से ग्रस्त मानी जाती है। इनमें से कई लोग अपने हकलाने को जीवन में प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण बाधा मानते हैं।
वे साक्षात्कार में शामिल होने से हिचकिचाते हैं। वे बेवजह काम पर जाने से डरते हैं और अपनी पढ़ाई को भी टालते रहते हैं। कुछ लोग सरकारी या बैंक की नौकरी की परीक्षाओं की तैयारी में सालों बिताते हैं, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद होता है।
उनका मानना है कि अगर उन्हें हकलाने की समस्या न होती, तो वे अब तक जीवन में बहुत ऊंचाइयों पर पहुंच चुके होते।
लेकिन क्या ये सच है?
क्या आप जवाब जानने के लिए उत्सुक हैं?
अगर ऐसा है तो यह किताब आपके लिए है!
इस पुस्तक में, हकलाने वाले 40 व्यक्ति अपनी प्रेरणादायक सफलता की कहानियों को अपने शब्दों में साझा करते हैं।
यह पुस्तक निस्संदेह हकलाने वाले हर व्यक्ति के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा का काम करेगी।
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