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Jindagi Ke Rang / ज़िन्दगी के रंग मेरी कुछ कहानियाँ

Author Name: Rekha | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

कभी ज़ेहन में ख्याल आता था लिखना बहुत आसान है। बस चाहिये काग़ज़, क़लम, एक दिल, दिमाग़ और कुछ लफ़्ज़, बस लिखने का सिलसिला चल निकलता है। लेकिन जब लेखनी हाथों में लिया, तब समझ आया, कल्पना के सहारे ज़िंदगी के सच्चे रंग नहीं उकेरे जा सकते। ऐसे रंग कभी बहुत गहरे, कभी हल्के और कभी बदरंग हो जातें हैं।
लिखने के लिये चाहिये जिंदगी के सच्चे सबक, सच्ची घटनायें, अनुभव और  इनमें बहते पानी सा प्रवाह लाने के लिए थोड़ी कल्पनाएँ. तब ये  शब्दों और लफ़्जों का लिबास पहन कहानियाँ बनतीं हैं.
ज़िंदगी की कुछ चुनी घटनाओं को कहानियों में ढालने की यह कोशिश कैसी लगी? पढ़ कर देखिये।

 

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रेखा

मैं मनोविज्ञान में पीएचडी, मनोवैज्ञानिक काउंसिलर और एक लेखिका हूँ। नन्हें बच्चों से ले कर स्नातकोत्तर तक के छात्रों को पढ़ाने के दौरान मैंनें बहुत कुछ पढ़ा और लिखा। मेरे शोध के दौरान महिलाओं और बच्चों की समस्याओं की ओर ध्यान गया और उनकी बातों में मेरी रुचि में बढ़ गई। यह मेरे लेखन में भी झलकता है।
रचनात्मक लेखन में मेरी रुचि अनजाने व अवचेतन रूप से हुई। वर्षों पहले, पोस्ट ग्रेजुएट साइकोलॉजी के लिए स्टडी मटीरीयल, कुछ आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक लेख लिखने के बाद मुझे एहसास हुआ कि मुझे लिखना कितना पसंद है। इससे मुझे ताज़गी और ख़ुशी मिलती है। मेरी यह जीती-जागती पुस्तक लेखन के प्रति मेरे प्यार और लगाव का साकार रूप है।

 

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