Pradeep Panth

मैं प्रदीप कुमार तिवारी उत्तरप्रदेश के अमेठी जनपद की तहसील/विकासखण्ड मुसाफिरखाना का निवासी हूँ तथा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हूँ। मेरी शैक्षिक योग्यता एमएससी ( भौतिक शास्त्र ) और बीएड है। मैं प्रदीप पांथ उपनाम से लेखन का कार्य करता हूँ।
मैं प्रदीप कुमार तिवारी उत्तरप्रदेश के अमेठी जनपद की तहसील/विकासखण्ड मुसाफिरखाना का निवासी हूँ तथा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हूँ। मेरी शैक्षिक योग्यता एमएससी ( भौतिक शास्त्र ) और बीएड है। मैं प्रदीप पांथ उपनाम से लेखन का कार्य करता हूँ।

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अंतस्ताप

Books by प्रदीप पांथ

अन्तस्ताप वह तरल लावा है जो मन के किसी कोने से स्रावित होकर पूरे शरीर में संचरित हो जाता है। यह कभी हमारे रक्त में उबाल लाता है तो कभी इसकी तपिश के सामने हमारी नशों में बहता हुआ

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माटी का अभिनंदन

Books by प्रदीप पांथ

चूंकि भूतकाल से वर्तमान और वर्तमान से भविष्य काल की बुनियाद पड़ती है इसलिए  अपने इतिहास को विस्मृत कर बेहतर भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती है। 'माटी का अभिनंदन' काव्यांजलि उन

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उम्मीद का दिया

Books by प्रदीप पांथ

"उम्मीद का दिया" काव्य संग्रह में संकलित रचनाएं मानव जीवन की जटिलताओं, विसंगतियों और दिन प्रतिदिन घर गृहस्थी में जुटे आम आदमी की पीड़ाओं को देखकर- सुनकर आहत कवि की भावना काव्य का र

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'चलते रहना...'

Books by प्रदीप 'पांथ'

मनुष्य को न तो कभी मंजिल मिलती है और न ही कभी रास्ते खत्म होते हैं। और अधिक पाने की चाहत में मनुष्य एक मंजिल मिलते ही किसी दूसरी मंजिल को पाने के लिए नए रास्तों पर चल पड़ता है। मनुष्

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'दास्तान-ए-जिंदगी'

Books by प्रदीप 'पांथ'

ज़िंदगी की अजब दास्ताँ है, 
कब्र ही इसका अन्तिम मकाँ है। 
कल की खातिर दिखे भागता आदमी, 
ना जाने किसका गुमाँ है।।

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काव्य संग्रह 'आईना'

Books by प्रदीप 'पांथ'

मानव का सच्चा साथी वह स्वयं खुद ही होता है। लेकिन अहंकार भाव के वशीभूत होकर वह स्वयं से ही रूबरू नहीं हो पाता। अहंकार भाव से मुक्त होकर जब कभी भी मानव मुक्त हृदय हो एकाग्रचित्त हो

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बाबू जी

By Pradeep Panth in Mystery | Reads: 4,457 | Likes: 0

2. बाबू जीदरवाजे पर नीम के पेड़ के नीचे पड़ी कुर्सी पर बाबू जी आराम फरमाने की मुद्रा में बैठे हुए थे। घर के बरामदे में ख  Read More...

Published on Jun 14,2022 08:42 AM

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