হিন্দি

स्याही
By Sakshi Sharma in Poetry | পড়ার জন্য : 102 | পছন্দ: 2
मैं स्याही हूँ..मैं स्याही हूँहर कलम से जुड़ने आयी हूँ...तेरे शब्दों से एहसासों तक काये सफर तय करने आयी हूँ..! दीवारों प  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 7,2020 08:10 PM
रेत पर लिखा था कुछ।
By Pritesh Vyas (Pandit) in Poetry | পড়ার জন্য : 97 | পছন্দ: 0
                           रेत पर लिखा था कुछ,                             जो हमे दिख न सका,    &n  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 8,2020 08:47 AM
ज्योतिषी का सच
By ramashery in Mystery | পড়ার জন্য : 168 | পছন্দ: 0
हमारे देश के इतिहास में ज्योतिषियों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है लोग अपने भविष्य को जानने के लिए ज्योतिषियों की   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 8,2020 10:01 AM
न्यू लव स्टोरी
By Abhishek Gaukhede in Romance | পড়ার জন্য : 110 | পছন্দ: 0
ऋषि और स्नेहल दो साल से साथ है, लेकिन ऋषि की बात बात पर टोकने की आदत से स्नेहल परेशान होने लगती है, वो कही भी जाती थी तो  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 8,2020 10:54 AM
Quarantine ke pal
By Vidya Devadas Nair in Poetry | পড়ার জন্য : 172 | পছন্দ: 1
Aaj pata chala ghar me aata kahan rakha hai, Kitchen ki almari ke dusre maale par jhaankar dekka, Toh pata chala, ki do mahine pehele kharida hua besan, Abhi bhi vaise ka vaisa hai. Jab bartan dhone gayi toh kamzor vim ka tukda mila, Woh bai bhi kitni mahan thi, jo us bechare sabun ko ghis ghis kar   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 8,2020 11:02 AM
Likhawat
By sonam kushwaha in True Story | পড়ার জন্য : 101 | পছন্দ: 1
@pen_vibes_by_sayrana insta id na jane kb se likhna suru kia, syd smj nhi thi tbse likhna suru kia....                                                        &n  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 8,2020 03:30 PM
तेरे नाम पे
By Atul shagird in Poetry | পড়ার জন্য : 299 | পছন্দ: 7
तेरे नाम पे जंग करते है ये हवा के झोंके तेरी जुल्फों को तंग करते हैं तेरे लबों से शिक़ायत है शायद मुझे इसलिए अपनी कम  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 8,2020 09:56 PM
Woh sirf mera dost hai
By Vismai in Poetry | পড়ার জন্য : 122 | পছন্দ: 0
"Kyun nahi ho sakta woh mera dost" maine poocha iss samaaj se Kehti hai "tu ek ladki hai aur woh ek ladka" Dosti karte waqt mere nadaan dil ne yeh nahi dekha ki woh ek ladki hai ya ladka Bas ek dost nazar aaya aur karli dosti Kehne ko tho iss desh ko azaadi saalon pehle mili Lekin yeh kaisi azaadi j  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 8,2020 10:30 PM
मेरा सपना
By prerna sharma in Fantasy | পড়ার জন্য : 108 | পছন্দ: 1
  मेरा सपना   शाम का वक्त था!!!  तेज हवाएँ चल रही थीं!!! पेड़ ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे!!! सांय-सायं आवाज़ आ रही थी!!! ऐसे मौ  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 9,2020 01:22 AM
pyar ishq aur khuda
By Kumar Sabya Sachi in General Literary | পড়ার জন্য : 465 | পছন্দ: 0
Ye ishq nahi aasan , ye too aag ka dariya hai aur dub kar jana hai .doston ye kahani hai 52/c azad colony , himachal Pradesh ki jaha mai aur mere 3 dost meera , Krishna aur shirin ki hai 4 th partner is  the mr.hunk yani mai mera naam hai actually javed hai. Hm charo  bachpan se es colon  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 9,2020 12:30 PM
कल आना
By Prasun Agarwal in Poetry | পড়ার জন্য : 134 | পছন্দ: 1
आज मैं गुमसुम सा हूं, कल आना तुम जब चहकाने लगोगी, तब आना। आज मैं एक राज़ सा हूँ, कल आना तुम जब हमराज बनो, तब आना। आज मैं स्  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 9,2020 01:19 PM
Pehli Mulakat
By neetu maurya in True Story | পড়ার জন্য : 154 | পছন্দ: 1
# Pehli Mulakat #    लिखू कुछ मेरा हाल जिस दिन मिलना था तुझसे तय किये गए स्थान..।।।। था दिल मेरा थोड़ा घबराया ,खुशमाया सा और था   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 9,2020 02:05 PM
Har beti ki kahani
By Monisha Acharya in Poetry | পড়ার জন্য : 84 | পছন্দ: 0
Wo use maa k kaukh se janam toh lerahi thi ise dharti par ! Andar hi andar khud se puch rahi thi kya m mehfus bhi hu ise dharti par! Jaha har din nirbhaya damini chutki milti hai,jaha har roj ek ladki bhar niklne se pehele sau bar sochti hai. Kaisa hai yeh samaj humara kuch hojaye toh ine k kapdo ki  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 9,2020 06:04 PM
Har beti ki kahani
By Monisha Acharya in Poetry | পড়ার জন্য : 82 | পছন্দ: 0
Wo use maa k kaukh se janam toh lerahi thi ise dharti par ! Andar hi andar khud se puch rahi thi kya m mehfus bhi hu ise dharti par! Jaha har din nirbhaya damini chutki milti hai,jaha har roj ek ladki bhar niklne se pehele sau bar sochti hai. Kaisa hai yeh samaj humara kuch hojaye toh ine k kapdo ki  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 9,2020 06:06 PM
chuupi
By Nitisha Bhaduri in Poetry | পড়ার জন্য : 101 | পছন্দ: 0
  अलग -अलग टेबल पर,  इंतज़ार की गाडी है गिनते हुए , अनजान था खुद से,की कभी नज़र टकराएगी तुमसे| दो! अजनबी बन,  हर दिन मिल  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Jun 9,2020 10:51 PM