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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Pal“अग्निपथ (द्वितीय संस्करण)” केवल कहानियों का संग्रह नहीं है, बल्कि जीवन के गहरे अनुभवों और मानवीय भावनाओं का दर्पण है। इस पुस्तक में आपको संघर्ष की तपिश, रिश्तों की मिठास, आत्मबल की आहट और उम्मीद की ताज़गी मिलेगी।
पहले संस्करण की सफलता और पाठकों के बीच मिली सराहना के बाद, यह नया संस्करण आपके हाथों में है, संशोधित भाषा, नये दृष्टिकोण और नई कहानियों के साथ:
मोबाइल की बैटरी – समय का असली इस्तेमाल
बस का टिकट – सफर सबका होता है
बारिश की पहली बूंद – उम्मीद की ताकत
यह किताब उन पाठकों के लिए है जो दिल से सोचते हैं और सोचकर जीते हैं। हर कहानी आपको अपने भीतर झाँकने और जीवन को नए नज़रिए से देखने के लिए प्रेरित करेगी।
“अग्निपथ” आपको यह एहसास कराएगी कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, आत्मबल और उम्मीद से हर राह आसान की जा सकती है।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.धीरेंद्र सिंह बिष्ट
धीरेंद्र सिंह बिष्ट का जन्म उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले के एक छोटे से कस्बे बिंदुखत्ता में हुआ। साधारण परिवार से आने वाले धीरेंद्र ने अपने जीवन में संघर्षों और कठिनाइयों को बहुत करीब से देखा और समझा। इन्हीं अनुभवों ने उनकी लेखनी को गहराई और संवेदना दी।
कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल से स्नातक करने के बाद धीरेंद्र ने कॉर्पोरेट जगत में अपने करियर की शुरुआत की और वर्तमान में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं। पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपने भीतर के लेखक को जीवित रखा। उनकी लेखन-यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जुनून और लगन किसी भी व्यस्त जीवन में अपना रास्ता ढूँढ ही लेते हैं।
धीरेंद्र एक संवेदनशील लेखक, प्रेरणादायक विचारक और विचारशील कहानीकार हैं। उनकी कहानियाँ साधारण जीवन की असाधारण गहराइयों को उजागर करती हैं। वे रिश्तों की नमी, संघर्ष की तपिश, उम्मीद की ताजगी और आत्मबल की खामोश आवाज़ को शब्दों में ढालते हैं। उनकी लेखनी न केवल सोचने पर मजबूर करती है, बल्कि पाठकों को भीतर से छू जाती है।
उनकी प्रकाशित पुस्तकों में शामिल हैं:
अग्निपथ (कहानी-संग्रह)
मन की हार, ज़िंदगी की जीत
फोकटिया
काठगोदाम की गर्मियाँ
खाली जेब, बड़ा सपना
बर्फ़ के पीछे कोई था
जब पहाड़ रो पड़े
उनकी पुस्तकों ने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी पाठकों का दिल जीता है। “अग्निपथ” के पहले संस्करण की सफलता ने साबित किया कि धीरेंद्र की कहानियाँ सीमाओं से परे जाकर भी लोगों की आत्मा को छू लेती हैं। यही कारण है कि उन्होंने इसका द्वितीय संस्करण पाठकों के लिए नए दृष्टिकोण और नई कहानियों के साथ प्रस्तुत किया।
धीरेंद्र की लेखनी उन लोगों के लिए है जो शब्दों से नहीं, संवेदनाओं से जुड़ना चाहते हैं। उनके लिए साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मबल का स्रोत है।
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