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Bharatiya Sant Sahity Parampara / भारतीय संत साहित्य परंपरा

Author Name: Dr.s.a.manjunath | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

संत-साहित्य का चिंतन विभिन्न विचार-सरणियों का अपूर्व समुच्चय है। अज्ञान, अशिक्षा और अनैतिकता का अंधकारमय युग काल में ये संत जनता के निम्न स्तर से संबंधित ज्ञान की जो ज्योति प्रज्ज्वलित की, वह अद्भूत एवं अपूर्व है। सुसंस्कृत युग और सुशिक्षित समाज के प्रतिष्ठित संतों द्वारा उच्चकोटि की भक्ति साहित्य का सृजन होना कम महत्त्व की बात नहीं किन्तु अपने पतन की चरमावस्था में भी पतित, दलित एवं जर्जरित समाज का ऐसे महान प्रतिभाशाली, गंभीर चिंतक एवं स्पष्टवक्ता संत, वचनकार को जन्म दे देना ऐसा आश्चर्य है जिसका दूसरा उदाहरण विश्व-इतिहास में शायद ही कहीं अन्यत्र मिले। संतों की शाश्वत वाणी का महत्त्व मध्ययुग में ही नहीं, भारतीय संस्कृति के लिए हर युग में महत्व का है।  

इस पुस्तक में देश के विभिन्न भाषा के संत साहित्यकारों का परिचय प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है । इस पुस्तक में देश के अलग-अलग प्रदेशों के प्रमुख संत साहित्यकारों से संबंधित शोधपरक लेख संगृहित हैं । हिन्दी प्रदेश के संतसाहित्यकार और हिन्दीतर प्रदेश के जैसे कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा आदि राज्यों से संत साहित्यकारों पर, ज्ञानी रचनाकारों ने महत्वपूर्ण लेख प्रदान करके इस सारस्वत कार्य को समृद्ध बनाया ।

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डॉ. एस. ए. मंजुनाथ

कर्नाटक के जिला हासन के श्रवणबेलगोला में जन्म । माता-पिता स्वं. श्रीमति मायम्मा और स्व. अंदानिगौडा । कर्नाटक के मैसूरु विश्वविद्यालय से बी.काम, एम.ए. और पी.एच-डी उपाधियाँ प्राप्त । आगरा के केंद्रीय हिन्दी संस्थान से हिन्दी पारंगत (बी.एड) और इलाहाबाद के साहित्य सम्मेलन से हिन्दी साहित्य रत्न प्राप्त ।  “नरेंद्र कोहली का व्यंग्य साहित्य: एक अध्ययन”  विषय पर शोध कार्य । तुलसीदास, कबीर औरहिन्दी व्यंग्य साहित्य पर विशेष अध्ययन ।1992से 2005 तक नेहरू स्मारक महाविद्यालय सुल्या, 2005 से2014 संत फिलोमिना कॉलेज, पुत्तूरु और 2015 से पोंपै कॉलेज, ऐकला, मंगलूरु में हिन्दी अध्यापक के रूप में सेवारत । “नरेंद्र कोहली का व्यंग्य साहित्य : एक अध्ययन”,  “हिन्दी के व्यंग्य सर्जक नरेंद्र कोहली”, “हिन्दी व्यंग्य साहित्य एक समीक्षात्मक अध्ययन”, और “हिन्दी में व्यंग्य विमर्श एवं नरेंद्र कोहली”, “सुबोध हिन्दी व्याकरण”, “प्रयोजनमूलक हिन्दी”, और “सरल हिन्दी व्याकरण और रचना”, विषय पर ग्रंथ प्रकाशित हैं । “मार्गदर्शी”, “हिन्दी मंगला”, “विहास वाहिनी”, “विहास वाणी”, “आधुनिक हिन्दी काव्य: एक अवलोकन”, “विहास मंगला” और “हिन्दी कहानी और वर्तमान समय”, पुस्तकों का संपादन कार्य संपन्न है । “भारतीय संत साहित्य परंपरा”, प्रकाशनाधीन है । भगवाअनदास मोरवाल के उपन्यास “शकुंतिका” का कन्नड अनुवाद प्रकाशनाधीन है । राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में लगभग 20 शोध पत्र प्रस्तुति और प्रकाशित हैं । तीन पी.एच-डी और सात एम.फिल कार्य में मार्गदर्शक । हिन्दी स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग में बीस वर्ष से हिन्दी प्रचार-प्रसार में कार्यरत हैं । लगभग 10 राष्ट्रीय हिन्दी कार्यशाला एवं संगोष्ठियों का आयोजन । वर्तमान में कर्नाटक राज्य विश्वविद्यालय महाविद्यालय हिन्दी अध्यापक संघ, बेंगलूरु, कर्नाटक के अध्यक्ष और मंगलूरु विश्वविद्यालय कॉलेज अध्यापक संघ, मंगलूरू, (अमुक्त) कर्नाटक के उपाध्यक्ष हैं ।संपर्क : कॉलेज :हिन्दीविभागाध्यक्ष, पोंपैकॉलेज, ऐकला, मंगलूर, कर्नाटक-574141, Email:manjuspc66@gmail.com.Cell: 9449546665, 8310895047, घर:#1042/15(C),चंदना, लक्ष्मीप्रसन्न लेऔट, ग्राम केम्मिंजे, दर्बे पोस्ट, पुत्तूरु.द.क. कर्नाटक-574202.

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