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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palशब्द, जिसके होते हैं,
भावनाएं भी उसकी होती हैं।
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राधा बनना है या मीरा बनना है
ये राह प्रेम एसी है
जिसे खुद ही चुनना है,
बनने को तुम, रुक्मणि ही बन जाओ
बस दरकार इतनी है,
कि जरा सोच कर चुनना
कि तुम्हे साथ चुनना है
या तुम्हे प्रेम चुनना है।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.अनुराग गौतम
जैसे कोई एक पल का विचार, एक अनछुई इच्छा और एक उत्सुक नज़र, ये सब वही हैं जो इस नए कवि को तस्वीर में लाता है। भारत में जन्मे और पले-बढ़े, कविताओं पर अपनी पहली पुस्तक के साथ आते हैं। जो जीवन के अलग-अलग कई स्तरों की शैलियों का संकलन है। इंजीनियरिंग और एमबीए पढ़ चुके, “अनुराग गौतम”, एक पृथक नज़रिये से देखते और लिखते हैं उन भावनाओ को जिस हर दिल महसूस करता और जूझता है। जीवन में आये कई मोड़ जैसे : प्रेम से मुलाकात, खुद की पहचान, दूरी, लोग, दुनिया का अस्तित्व और इन मोड़ों के साथ संघर्ष की आपकी कहानियों को आसान लफ्जो में कागज़ पे लिखा गया है।
शब्दों में क्या नहीं होता और अगर कुछ मन की खूबसूरती से लिखा गया हो तब शब्द एक ख्याल से जुड़ जाते हैं। इनके शब्द, कविताएँ और विचार आपको चकित छोड़ देंगे और शायद आपके अंदर सोए हुए कवि और हिंदी के प्रति प्रेम को जगा देंगे।
जैसा कि मानवीय दर्शन और मौजूदा विश्व व्यवस्था में उनकी गहरी दिलचस्पी है, लिखी गयी सुंदर रचनाएँ व कविताओं का संकलन कवि की कलम के माध्यम से पाठकों के लिए बहुत कुछ अनावृत करेगा।
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