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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palबिहार के भोजपुर जिला बिहिया की महथिन माई की सच्ची सती कथा का यह ऐतिहासिक उपन्यास है महथिन की डोली! महथिन दो हजार वर्ष पहले अपने तपोबल से अग्नि प्रकट कर सती हो गई और उनके एक श्राप से राजा रणपाल का राज्य सहित अंत हो गया। रणपाल ने डोला छेकाई की प्रथा लागू की थी, वह एक रात नवदुल्हन को अपने महल में रखता था। महथिन अपने पति के साथ ब्याह कर ससुराल जा रही थीं। उन्हें डोला छेकाई की प्रथा मंजूर नहीं थी और अपने सतीत्व की रक्षा के लिए सती हो गईं। पुस्तक अंश: महथिन (रागमती) खड़ी हो गई और हुंकारते हुए बोली, “नीच सेनापति! वही रुक जा। जाके अपने नीच राजा से मेरा संदेशा दे देना कि दुष्ट, नीच रणपाल तेरी वासनामयी आँखों की पुतली में इतनी शक्ति नहीं है, जो तू मुझे देख सके मुझ पर कुदृष्टि डाल सके! मैं रागमती ब्राह्मण श्री श्रीधर चौबे की पुत्री, भार्गव कुल में उत्पन्न हुई भगवान परशुराम की वंशज और गौतम कुल के वंशज ब्राह्मण श्री महंथ जी की धर्मपत्नी महथिन तुम्हें श्राप देती हूँ कि तू और तेरे हैहय वंश का तत्क्षण (तुरंत) नाश हो जाए! तेरे पूरे वंश और वंशजों का नाश हो जाए। तेरे कुल में भविष्य में कोई पानी देने वाला नहीं बचेगा। अनगिनत नवविवाहिताओं का दुष्कर्म ही तेरा काल बना! मेरा श्राप तेरे लिए अजेय है!” वर्तमान में महथिन माई देवी की तरह पूजी जाती हैं, लेकिन उनके पति महंथ जी को क्यों भूला दिया गया? महथिन को क्यों ‘महथिन माई’ कहा जाता है? रणपाल का अंत कैसे हुआ? रेलवे लाइन कैसे खुद उखड़ जाती थी? कैसे अंग्रेज अफसर की कोढ़ की बीमारी दूर हुई? महथिन मंदिर में बिकने वाली गुड़ की जलेबी और छोला इतना स्वादिष्ट क्यों लगता है? नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ ने हर प्रश्न का उत्तर बहुत बारीकी से दिया है।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.नीतू सुदीप्ति 'नित्या'
हिन्दी-भोजपुरी की लेखिका नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ का नवीनतम ऐतिहासिक उपन्यास महथिन की डोली हाल ही में प्रकाशित हुआ है। नीतू की अभी तक छव पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें हमसफ़र और छंटते हुए चावल (कथा संग्रह) विजय पर्व (भोजपुरी उपन्यास) चीकू-मीकू का उपहार (बाल कथा संग्रह) इश्क समंदर (प्रेम उपन्यास) कांच की किरचें (लघुकथा संग्रह)। छंटते हुए चावल और विजय पर्व पुस्तक को पुरस्कृत किया जा चुका है। इसके अलावा नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ कई साहित्यिक संस्थाओं से पुरस्कृत और सम्मानित भी हो चुकी हैं।
नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ बिहार के भोजपुर जिला बिहिया की निवासी हैं और महथिन माई इसी बिहिया नगरी में लगभग दो हजार वर्ष पहले एक आताताई राजा रणपाल के कारण सती हो गई थीं। वह अपने पति के साथ ब्याह कर ससुराल जा रही थीं और राजा रणपाल ने अपने राज्य में डोला छेकाई की प्रथा लागू कर रखी थी जिससे वह एक रात नवदुल्हन को अपने महल में रखता था। डोला छेकाई की प्रथा महथिन को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं था और अपने सतीत्व की रक्षा के लिए उन्होंने अपने तपोबल से अग्नि प्रकट कर सती हो गईं। कथा लिखते समय महथिन माई की छोटी सी छोटी बातों को भी उपन्यास में पिरोया है, जिससे अभी तक लोग इससे अनभिज्ञ थे। एकदम चुटीले अंदाज में ऐतिहासिक उपन्यास महथिन की डोली नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ ने लिखा है जिससे पाठक बँधता चला जाता है।
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