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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Pal"महेश आमदे का रचना संसार" लेखक की प्रकाशित होने वाली पहली किताब है। इतिहास संस्कृति एवं स्वतंत्रता सेनानियों पर केंद्रित इस किताब में पद्य एवं गद्य दोनों तरह की रचनाएं सम्मिलित हैं। पहले भाग में बारह कविताएं तथा एक नृत्य नाटिका है और दूसरे भाग में छत्तीसगढ़ तथा कबीरधाम जिले से संबंधित महत्वपूर्ण सात ऐतिहासिक लेख संकलित हैं।
लेखक इतिहास विषय के अच्छे अध्येता और अध्यापक रहे हैं, इसलिए उनकी रचनाओं में ऐतिहासिक तथ्यों की समझ और ज्ञान स्वभाविक रूप से देखा जा सकता है। मगर लेखक की काव्यात्मक अभिव्यक्ति की प्रतिभा और कुशलता लेखक की विशिष्टता का परिचायक है। उनकी पुस्तक के पहले भाग में ऐतिहासिक तथ्यों की काव्यात्मक अभिव्यक्ति हुई है जिसमें ऐतिहासिकता और साहित्यिकता का सुंदर मिश्रण देखे जा सकते हैं जबकि दूसरे भाग में ऐतिहासिक तथ्यों एवं आंकड़ों पर लेख लिखे गए हैं जिसमें साहित्य नहीं बल्कि केवल इतिहास है। इस तरह लेखक की रचनाओं में ऐतिहासिकता,काव्यात्मकता और स्थानीयता का अद्भुत मेल देखा जा सकता है।
पुस्तक के दूसरे भाग में छत्तीसगढ़ एवं कबीरधाम जिले के इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजी आंकड़ों एवं जानकारियों को संकलित किया गया है। मुझे विश्वास है कि यह भाग इतिहास तथा पुरातत्व में रुचि रखने वाले शोध छात्र-छात्राओं एवं अन्वेषकों के लिए उपयोगी साबित होगा।
महेश आमदे
महेश आमदे उन दुर्लभ व्यक्तियों में हैं जिनके व्यक्तित्व में ज्ञान और विनम्रता का अद्भुत मेल है। आज जब “अपना ढोल आप बजाओ” की प्रवृत्ति सर्वत्र दिखाई पड़ती है,वे संकोच की हद तक खामोश रहते हैं। वे अकादमिक विशेषज्ञ नहीं हैं, न ही इस तरफ उन्होंने कभी ध्यान दिया। बिखरे रूप में ही सही उनके पास इतिहास और समाज का व्यापक ज्ञान है जिसके कारण विशेषज्ञता का दावा करने वाले अकसर उनसे सलाह लेते रहते हैं। मैं अकसर सोचता हूँ यदि उन्होंने गद्य लेखन का थोड़ा भी अभ्यास कर लिया होता तो हिंदी समाज को वे बहुत कुछ दे सकते थे। वैसे देर अभी भी नहीं हुई है!
उनको करीब से जानने वाले जानते हैं कि क्षेत्रीय इतिहास और राजनीति की जानकारी का उनके पास भंडार है । यों वे पेशे से अध्यापक रहे हैं इस कारण भी उनके ज्ञान का एक बड़ा श्रोता वर्ग रहा है, वे मुख्यतः वाचिक परम्परा के विद्वान हैं। इधर उन्होंने काव्य रूप में इतिहास, परम्परा और लोकगाथाओं को प्रस्तुत करने का जो कार्य शुरू किया है, निश्चित रूप से उससे आने वाली पीढ़ी को उनके ज्ञान और समझ का लाभ मिलेगा। यह पुस्तक उसी श्रृंखला की एक कड़ी है।
परिचय
मातास्व. श्रीमती बुँदकुँवर बाई
पिता स्व. श्री भुलऊ राम आमदे
पत्नी - श्रीमती सुरेखा आमदे
जन्म 08.06.1959
पुत्र - अभिषेक आमदे, सौरभ आमदे शिक्षा - एम. ए. इतिहास व हिंदी व्यवसाय अवकाश प्राप्त व्याख्याता (इतिहास)
जन्म स्थान - झिरौनी
पता - शंकर नगर, वार्ड नं 08 कवर्धा, जिला- कबीरधाम,
छत्तीसगढ़
उपलब्धि - 7 अप्रेल 2013 को "कबीरधाम आख्यान" व 18.3.2015 को "भोरमदेव आख्यान" भोरमदेव महोत्सव में कक्षा छठवीं से आठवीं के छात्र- छात्राओं द्वारा गीत, संगीत, नृत्य व अभिनय के माध्यम से शैक्षिक नवाचार के रूप में प्रस्तुतिकरण हुआ।
संपर्क- 9993133242
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