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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palकबीरा खड़ा बाज़ार में...प्रगतिशील वैचारिक मंच । हम साहित्य और समाज को जोड़ने के लिए पुल का कार्य कर रहें हैं, पुस्तक प्रकाशन, विचार गोष्ठी आदि का आयोजन हमारे अन्य आयाम है।Read More...
कबीरा खड़ा बाज़ार में...प्रगतिशील वैचारिक मंच ।
हम साहित्य और समाज को जोड़ने के लिए पुल का कार्य कर रहें हैं, पुस्तक प्रकाशन, विचार गोष्ठी आदि का आयोजन हमारे अन्य आयाम है।
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इस पुस्तक में ऐसी फ़िल्मों पर ही बात की गई है जिन्हे ‘सार्थक’ फ़िल्म कह सकते हैं और जिनमे मुझे अपनी कुछ बातें कहने की गुंजाइश दिखी है। इसमें मैंने मुख्यत: इन फ़िल्मों की वैचार
इस पुस्तक में ऐसी फ़िल्मों पर ही बात की गई है जिन्हे ‘सार्थक’ फ़िल्म कह सकते हैं और जिनमे मुझे अपनी कुछ बातें कहने की गुंजाइश दिखी है। इसमें मैंने मुख्यत: इन फ़िल्मों की वैचारिक पृष्टभूमि का विवेचन किया है, कलापक्ष पर बात नहीं की है। इसका कारण स्वाभाविक रूप से मेरी समझ की सीमा है। मैं फिल्म निर्देशन के कलापक्ष से अनभिज्ञ हूं अतः उस पर बात करना संभव नहीं था।
इस पुस्तक में ऐसी फ़िल्मों पर ही बात की गई है जिन्हे ‘सार्थक’ फ़िल्म कह सकते हैं और जिनमे मुझे अपनी कुछ बातें कहने की गुंजाइश दिखी है। इसमें मैंने मुख्यत: इन फ़िल्मों की वैचार
इस पुस्तक में ऐसी फ़िल्मों पर ही बात की गई है जिन्हे ‘सार्थक’ फ़िल्म कह सकते हैं और जिनमे मुझे अपनी कुछ बातें कहने की गुंजाइश दिखी है। इसमें मैंने मुख्यत: इन फ़िल्मों की वैचारिक पृष्टभूमि का विवेचन किया है, कलापक्ष पर बात नहीं की है। इसका कारण स्वाभाविक रूप से मेरी समझ की सीमा है। मैं फिल्म निर्देशन के कलापक्ष से अनभिज्ञ हूं अतः उस पर बात करना संभव नहीं था।
सुखदेव जी सरल शब्द मा गूढ़ बात करे के हुनर ला अपन पहिली छन्द संग्रह “बगरय छन्द अँजोर” मा साबित कर चुके हें। ये ग़ज़ल संग्रह मा घलो अइसने हुनर देखे बर मिलत हे।आज के जिनगी मा संघर्ष
सुखदेव जी सरल शब्द मा गूढ़ बात करे के हुनर ला अपन पहिली छन्द संग्रह “बगरय छन्द अँजोर” मा साबित कर चुके हें। ये ग़ज़ल संग्रह मा घलो अइसने हुनर देखे बर मिलत हे।आज के जिनगी मा संघर्ष हे। जीये के संघर्ष, पेट भरे के संघर्ष, नौकरी के संघर्ष, टूटत रिश्ता-नाता ला संजो के रखे के संघर्ष, अस्तित्व के संघर्ष, अस्मिता के संघर्ष आदि। माने आम जनता के जिनगी मा अनेक विसंगति के संग चौबीसों घण्टा युद्ध चलत हे। आधुनिकता के चक्कर मा नैतिकता नँदावत हे। सुखदेव सिंह अहिलेश्वर के ग़ज़ल मा आम मनखे के पीरा ला स्वर दे गेहे। नैतिकता ला पुनर्स्थापित करे के उदिम करे गेहे। सोये मनखे ला जगाए के कोशिश करे गेहे। वर्तमान के झंझावात ला रेखांकित करे गेहे। हर ग़ज़ल मा सुखदेव जी के गहन चिंतन दिखत हे।
सुखदेव जी सरल शब्द मा गूढ़ बात करे के हुनर ला अपन पहिली छन्द संग्रह “बगरय छन्द अँजोर” मा साबित कर चुके हें। ये ग़ज़ल संग्रह मा घलो अइसने हुनर देखे बर मिलत हे।आज के जिनगी मा संघर्ष
सुखदेव जी सरल शब्द मा गूढ़ बात करे के हुनर ला अपन पहिली छन्द संग्रह “बगरय छन्द अँजोर” मा साबित कर चुके हें। ये ग़ज़ल संग्रह मा घलो अइसने हुनर देखे बर मिलत हे।आज के जिनगी मा संघर्ष हे। जीये के संघर्ष, पेट भरे के संघर्ष, नौकरी के संघर्ष, टूटत रिश्ता-नाता ला संजो के रखे के संघर्ष, अस्तित्व के संघर्ष, अस्मिता के संघर्ष आदि। माने आम जनता के जिनगी मा अनेक विसंगति के संग चौबीसों घण्टा युद्ध चलत हे। आधुनिकता के चक्कर मा नैतिकता नँदावत हे। सुखदेव सिंह अहिलेश्वर के ग़ज़ल मा आम मनखे के पीरा ला स्वर दे गेहे। नैतिकता ला पुनर्स्थापित करे के उदिम करे गेहे। सोये मनखे ला जगाए के कोशिश करे गेहे। वर्तमान के झंझावात ला रेखांकित करे गेहे। हर ग़ज़ल मा सुखदेव जी के गहन चिंतन दिखत हे।
भोरमदेव मंदिर पर, अंग्रेज अधिकारियों के बाद डॉ. सीताराम शर्मा और डॉ. गजेन्द्र कुमार चन्द्रौल जैसे विद्वानों के अध्ययन-क्रम में अब अजय चंद्रवंशी ने बीड़ा उठाया है। वे न सिर्फ क्
भोरमदेव मंदिर पर, अंग्रेज अधिकारियों के बाद डॉ. सीताराम शर्मा और डॉ. गजेन्द्र कुमार चन्द्रौल जैसे विद्वानों के अध्ययन-क्रम में अब अजय चंद्रवंशी ने बीड़ा उठाया है। वे न सिर्फ क्षेत्रीय इतिहास, बल्कि फिल्म, साहित्य आदि के भी सजग अध्येता हैं और तथ्यों की प्रस्तुति में रोचकता और विश्वसनीयता का संतुलन बनाए रखते हैं। उनकी यह पुस्तक भोरमदेव से संबंधित अब तक प्रकाशित लगभग सभी महत्वपूर्ण प्रकाशन, स्रोत-सामग्री का उपयोग कर तैयार की गई है, जिसमें उनकी सजग मीमांसा-दृष्टि के भी दर्शन होते हैं। इसलिए यह प्रकाशन भोरमदेव, क्षेत्रीय इतिहास और कला परंपरा की दस्तावेज के रूप में उपयोगी प्रतिमान साबित होगा, मेरा ऐसा विश्वास और शुभकामनाएं हैं।
-राहुल कुमार सिंह
रचनाओं में 'कवितापन' कितना है ये तो पाठक ही तय करेंगे। इतने वर्षों में मुझे कभी नहीं लगा कि कवि होना कुछ और होना होता है। यानी मुझे सामान्य व्यक्ति से कवि होने की कुछ अलग अनुभूति
रचनाओं में 'कवितापन' कितना है ये तो पाठक ही तय करेंगे। इतने वर्षों में मुझे कभी नहीं लगा कि कवि होना कुछ और होना होता है। यानी मुझे सामान्य व्यक्ति से कवि होने की कुछ अलग अनुभूति कभी नहीं हुई। कई संवेदनात्मक घटनाएं, अनुभूति, मान-अपमान जब कभी मेरी सम्वेदनाओं को छूती हैं, झकझोरती हैं तो कोई पंक्ति ज़ेहन में उभर आती रही हैं। उन्हीं का विस्तार रचनाओं के रूप में प्रकट हुआ है। कई बार पंक्तियां बस डायरी में दर्ज रह जाती हैं, वे रचना का रूप नहीं ले पातीं । कुछ रचनाओं का रूप लेती रही हैं। ऐसा बहुत कम बार हुआ है कि पूरी कविता एक बार में लिखी गई हो,बहुधा अंतराल में पूरी होती रही हैं। यह कविता संग्रह विगत दो दशकों के दौरान लिखी कविताओं का संग्रह है।
"महेश आमदे का रचना संसार" लेखक की प्रकाशित होने वाली पहली किताब है। इतिहास संस्कृति एवं स्वतंत्रता सेनानियों पर केंद्रित इस किताब में पद्य एवं गद्य दोनों तरह की रचनाएं सम्मिलि
"महेश आमदे का रचना संसार" लेखक की प्रकाशित होने वाली पहली किताब है। इतिहास संस्कृति एवं स्वतंत्रता सेनानियों पर केंद्रित इस किताब में पद्य एवं गद्य दोनों तरह की रचनाएं सम्मिलित हैं। पहले भाग में बारह कविताएं तथा एक नृत्य नाटिका है और दूसरे भाग में छत्तीसगढ़ तथा कबीरधाम जिले से संबंधित महत्वपूर्ण सात ऐतिहासिक लेख संकलित हैं।
लेखक इतिहास विषय के अच्छे अध्येता और अध्यापक रहे हैं, इसलिए उनकी रचनाओं में ऐतिहासिक तथ्यों की समझ और ज्ञान स्वभाविक रूप से देखा जा सकता है। मगर लेखक की काव्यात्मक अभिव्यक्ति की प्रतिभा और कुशलता लेखक की विशिष्टता का परिचायक है। उनकी पुस्तक के पहले भाग में ऐतिहासिक तथ्यों की काव्यात्मक अभिव्यक्ति हुई है जिसमें ऐतिहासिकता और साहित्यिकता का सुंदर मिश्रण देखे जा सकते हैं जबकि दूसरे भाग में ऐतिहासिक तथ्यों एवं आंकड़ों पर लेख लिखे गए हैं जिसमें साहित्य नहीं बल्कि केवल इतिहास है। इस तरह लेखक की रचनाओं में ऐतिहासिकता,काव्यात्मकता और स्थानीयता का अद्भुत मेल देखा जा सकता है।
पुस्तक के दूसरे भाग में छत्तीसगढ़ एवं कबीरधाम जिले के इतिहास से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजी आंकड़ों एवं जानकारियों को संकलित किया गया है। मुझे विश्वास है कि यह भाग इतिहास तथा पुरातत्व में रुचि रखने वाले शोध छात्र-छात्राओं एवं अन्वेषकों के लिए उपयोगी साबित होगा।
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