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NAT KUNDALI / नट कुंडली वृहद भाव भरे, सूक्ष्म हाइकु

Author Name: Dr. Arti 'Lokesh' | Format: Hardcover | Genre : Poetry | Other Details

श्री कमलेश भट्ट जी के शब्दों में- आरती 'लोकेश' हाइकु को 'कठिन तपस्या' मानती हैं। उनकी यह 'तपस्या' हाइकु कविता के उन्नायक और दिशावाहक प्रोफेसर सत्यभूषण वर्मा (1932-2005) के उस कथन की ही पुष्टि करती है जिसमें वे हाइकु को 'शब्दों की साधना' कहते थे। वे हाइकु को 'उगते सूर्य के देश की किरण' के रूप में भी रेखांकित करती हैं। 'नट कुंडली' में आरती के 321 हाइकु संग्रहीत हैं, जिन्हें उन्होंने अलग-अलग 5 खंडों व 25 उपखंडों में बाँट रखा है। आरती लोकेश के हाइकु प्रायः शब्द-चित्रों के रूप में हैं। बिम्ब की सृष्टि में नएपन से एक अलग तरह की सौंदर्यानुभूति उत्पन्न हुई है। आरती ने पूरे यू.ए.ई. के महत्वपूर्ण और सिग्नेचर केंद्रों को जिस तरह हाइकु कविता में बाँधा है, वह महत्वपूर्ण भी है और अर्थपूर्ण भी। 'नट कुंडली' में शब्दों से अर्थ की यह यात्रा हमें बार-बार काव्य-रस से भिगोती दिखाई देती है। वह हमें जगाती भी है, झिंझोड़ती भी है और हमारे सामने सवाल भी खड़े करती है।

'नट कुंडली' डॉ. आरती 'लोकेश' की 26वीं कृति है। काव्य विधा में यह उनकी पाँचवीं तथा हाइकु की प्रथम पुस्तक है। यह संग्रह 'हाइकु' जैसी संक्षिप्त किन्तु प्रभावशाली काव्य विधा को समर्पित है, जो आकार में छोटी होते हुए भी गहन अर्थ और व्यापक संवेदना प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक में 321 हिंदी हाइकु संकलित हैं, जिन्हें पाठकों की सुविधा के लिए हाइकुओं को पाँच प्रमुख अध्यायों में विभाजित किया गया है- प्रभु आख्यान, यू.ए.ई. शान, प्रकृति भान, जीवन मान तथा ज्ञान-विज्ञान। विषय-विविधता को ध्यान में रखते हुए इन अध्यायों को आगे उप-शीर्षकों में भी व्यवस्थित किया गया है, जिससे पठन और भी सुगम एवं रुचिकर बनता है।

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डॉ. आरती 'लोकेश'

डॉ. आरती ‘लोकेश’ ने अंग्रेज़ी साहित्य मास्टर्स में कॉलेज में द्वितीय स्थान तथा हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर में यूनिवर्सिटी स्वर्ण पदक प्राप्त किया। हिंदी साहित्य में पी.एच.डी. की उपाधि ली। तीन दशकों से शिक्षाविद, वर्तमान में दुबई में कार्यरत रहते हुए साहित्य की सतत सेवा में लीन हैं। 

पच्चीस वर्षों से दुबई में बसी प्रवासी लेखिका डॉ. आरती ‘लोकेश’ की 25 पुस्तकें प्रकाशित हैं। चार  उपन्यास ‘रोशनी का पहरा’, ‘कारागार’, ‘निर्जल सरसिज’,  'ऋतम्भरा के सौ द्वीप'; चार काव्य-संग्रह ‘काव्य रश्मि’, ‘छोड़ चले कदमों के निशाँ’, ‘प्रीत बसेरा’,  'षड्गंधा'; चार कहानी संग्रह ‘साँच की आँच’, ‘कुहासे के तुहिन’, ‘दूर्वादल’ व ‘फ़िबोनाची वितान; छ: कथेतर गद्य-संग्रह ‘कथ्य अकथ्य’, ‘अश्रुत श्रव्य’, ‘स्याह धवल’, ‘सात समुंदर पार’, ‘झरोखे’, शोध ग्रंथ ‘रघुवीर सहाय का गद्य साहित्य और सामाजिक चेतना’; सात संपादित-संकलित: ‘सोच इमाराती चश्मे से’, ‘होनहार बिरवान’, ‘डॉ. अशोक कुमार मंगलेश : काव्य एवं साहित्य चिंतन’, ‘अनन्य कृति यू.ए.ई.’, ‘यू.ए.ई. की चयनित रचनाएँ – स्वर्ण सचान काव्यजग’, ‘अनन्य संचय यू.ए.ई.’ तथा ‘वागीश वैश्विक लघुकथाएँ’।  

इनके साहित्य पर पंजाब, उड़ीसा व हरियाणा के विश्वविद्यालय में शोध कार्य किया जा रहा है व यूक्रेन में कहानियों पर शोध हो चुका है। 'अनन्य यू.ए.ई.' पत्रिका की मुख्य संपादक होने के साथ-साथ वे ‘श्री रामचरित भवन ह्यूस्टन’ की सह-संपादिका तथा ‘इंडियन जर्नल ऑफ़ सोशल कंसर्न्स’ की अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रीय संपादक हैं। प्रणाम पर्यटन पत्रिका की विशेष संवाददाता यूएई हैं। टैगोर विश्वविद्यालय तथा ‘विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस’ से सम्बद्ध हैं। 

उन्हें मॉरीशस व भारत सरकार द्वारा 'आप्रवासी हिंदी साहित्य सृजन सम्मान', ‘प्रवासी महाकवि प्रो. हरिशंकर ‘आदेश’ स्मृति साहित्य सम्मान’, ‘रंग राची सम्मान’, ‘शिक्षा रत्न’ सम्मान, ‘हिंदी शिक्षक सम्मान’ 'शब्द शिल्पी भूषण  सम्मान', 'प्रज्ञा सम्मान', ‘निर्मला स्मृति हिन्दी साहित्य रत्न सम्माrन’, ‘प्रवासी भारतीय समरस श्री साहित्य सम्मान’; वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स लंडन, भारतीय कौंसलावास दुबई, अंतर्राष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच, वैश्विक हिंदी संस्थान ह्यूस्टन, यू.एस.ए., साहित्य अर्पण मंच दुबई द्वारा प्रशस्ति-पत्र मिला है। ‘शुभ संकल्प एवं हुनर फ़ोक्स एकेडेमी’, ‘हिंदी ग्लोबल फ

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