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Phokatiya / फोकटिया एकतरफा रिश्तों की सच्ची कहानी

Author Name: DHIRENDRA SINGH BISHT | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

लेखक: धीरेन्द्र सिंह बिष्ट
भाषा: हिंदी | शैली: समकालीन सामाजिक कथा | प्रकाशन वर्ष: 2025

“फोकटिया” एक भावनात्मक रूप से सशक्त, यथार्थवादी और आत्मविश्लेषण पर आधारित हिंदी उपन्यास है, जो आधुनिक रिश्तों के जटिल पहलुओं को सामने लाता है।

इस कथा के केंद्र में है राजीव, एक साधारण लेकिन संवेदनशील युवा, जो अपनी सच्चाई, भरोसे और भावनाओं से रिश्तों को निभाता है। पर जब उसके सबसे करीबी दोस्त कमल की असलियत सामने आती है — कि वह सिर्फ लेता है, देता कुछ नहीं — तो राजीव एक आत्म-साक्षात्कार की यात्रा पर निकलता है।

यह उपन्यास एकतरफा रिश्तों की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जिसे समाज अक्सर नज़रअंदाज़ करता है। यह न केवल व्यक्तिगत अनुभवों को दर्शाता है, बल्कि पाठकों को आत्मसम्मान, भावनात्मक सीमाओं और ‘ना’ कहने की हिम्मत से जुड़ी महत्वपूर्ण सीख भी देता है।

मुख्य विशेषताएं:
 • एकतरफा दोस्ती और भावनात्मक शोषण की मार्मिक प्रस्तुति
 • आत्म-सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को प्रभावी ढंग से छूता है
 • सरल, सजीव और सशक्त भाषा शैली
 • उन पाठकों के लिए, जो वास्तविक जीवन से जुड़ी कहानियों की गहराई को समझते हैं

“फोकटिया” सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है — उन रिश्तों से सावधान रहने की, जो आपको भीतर से खोखला कर देते हैं।

यदि आपने कभी ऐसा रिश्ता निभाया है जहाँ आप ही सिर्फ देते रहे, तो यह पुस्तक आपकी अपनी कहानी है।

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Paperback

Ratings & Reviews

5 out of 5 (2 ratings) | Write a review
km2084998

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★★★★★
ये उपन्यास उन रिश्तों का आईना है, जो हमें खोखला करते हैं। दिल को छू जाने वाली कहानी आप सब एक बार जरूर पढ़ें।
helloanchal0

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★★★★★
"फोकटिया " केवल एक उपन्यास नहीं अपितु उन रिश्तों का एक आईना है, जिन्हें हम न चाहते हुए वो निभाते हैं। आप सब एक बार जरूर पढ़ें 🙏

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धीरेन्द्र सिंह बिष्ट

धीरेन्द्र सिंह बिष्ट उत्तराखंड के नैनीताल जनपद स्थित बिंदुखत्ता क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से पर्वतीय जीवन की सादगी, मानवीय संवेदनाओं की गहराई और सामाजिक यथार्थ को बेहद सहज, प्रभावशाली एवं संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत किया है। उनके साहित्य में उत्तराखंड की मिट्टी की महक, पहाड़ों की शांति, और आम लोगों के संघर्षों की गूंज स्पष्ट रूप से सुनाई देती है।

शुरुआत से ही साहित्य, समाज और मानवीय रिश्तों में गहरी रुचि रखने वाले धीरेन्द्र ने लेखन को केवल एक रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्म-अन्वेषण और सामाजिक संवाद का माध्यम बनाया है। उन्होंने अपने आसपास के अनुभवों, सामाजिक विसंगतियों और भीतर के मनोभावों को कहानियों के रूप में ढालकर पाठकों तक पहुँचाया है।

अब तक उनकी चार प्रमुख कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं:
 1. अग्निपथ – हर मोड़ एक कहानी
 2. मन की हार, ज़िंदगी जीत – एक सफर खुद से खुद तक
 3. काठगोदाम की गर्मियाँ – जब शहर की लड़की पहाड़ों से टकराई
 4. बर्फ के पीछे कोई था – जब कहानी चुप होती है तो पहाड़ बोलते हैं

उनकी नवीनतम पुस्तक “फोकटिया” एकतरफा और स्वार्थपूर्ण रिश्तों की परतें खोलने वाली मार्मिक कथा है, जो आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान जैसे विषयों को मजबूती से सामने लाती है।


धीरेन्द्र सिंह बिष्ट का उद्देश्य केवल कहानियाँ सुनाना नहीं, बल्कि पाठकों को सोचने पर विवश करना है — कि रिश्ते वही निभाने चाहिए, जिनमें आत्म-सम्मान और पारस्परिकता हो।

उनकी लेखनी पाठकों को न केवल भावनात्मक रूप से जोड़ती है, बल्कि उन्हें स्वयं की पहचान और निर्णय लेने की शक्ति भी प्रदान करती है।

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