प्रस्तुत किताब "सफ़र ख़ुद से ख़ुद तक " में लेखक ने धार्मिक , सामाजिक , और स्वदेश प्रेम को अपने शब्दों में पिरोने की कोशिश की है और समाज के हर पहलू पर पैनी नज़र रखते हुए कवि ने इस किताब की रचना की है
कवि ने अपने शब्दों के माध्यम से प्रेम को एक नया रूप देने का प्रयास किया है ।
कवि ने समाज की सारी विसंगतियों को समझते हुए बेटियों को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया है ।
कवि ने अपने किताब के माध्यम से लोगों से कहा है कि