Share this book with your friends

Saral Shrimad Bhagvad Geeta / सरल श्रीमद्भगवद्गीता

Author Name: Dr. Shyamsunder Sharma | Format: Paperback | Genre : Religion & Spirituality | Other Details

श्रीमद्भगवद्गीता का शुभारंभ धृतराष्ट्र की जिज्ञासा से हुआ और समापन संजय के कथन से। संजय ने कहा कि जहाॅं भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण और श्रेष्ठ धनुर्धारी अर्जुन हैं वहीं श्रीलक्ष्मी, ऐश्वर्य, विजयश्री, शक्ति एवं नीति हैं।
     

हम संसारी परोक्ष-अपरोक्ष रूप से इन सब की प्राप्ति ही तो चाहते हैं जिन्हें प्राप्त करना भगवान् श्रीकृष्ण की शरण में रहकर शत-प्रतिशत संभव है।  श्रीमद्भगवद्गीता हमें जीवन का स्वरूप बताती है, जीवन के स्वरूप में जीना सिखाती है। सभी प्रकार के अज्ञान, भ्रम, संदेहों को नष्ट करके मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। मुक्ति का अर्थ जीवन से मुक्ति ही नहीं अपितु  जीवन में तत्वज्ञान को जानकर, समझकर , अपनाकर , माया से परे रहकर, माया से मुक्त होकर भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञानुसार कर्म करना भी मुक्ति ही है। मुक्त ( अलिप्त ) रहकर ईश्वर को साक्षी मानकर, उनके अधीन और उनके लिये कर्म करें।

श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य के कल्याण का मार्ग है।

Read More...
Paperback

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book
Paperback 900

Inclusive of all taxes

Delivery

Item is available at

Enter pincode for exact delivery dates

डॉ. श्यामसुंदर शर्मा

श्रीमद्भगवद्गीता का शुभारंभ धृतराष्ट्र की जिज्ञासा से हुआ और समापन संजय के कथन से। संजय ने कहा कि जहाॅं भगवान योगेश्वर श्रीकृष्ण और श्रेष्ठ धनुर्धारी अर्जुन हैं वहीं श्रीलक्ष्मी, ऐश्वर्य, विजयश्री, शक्ति एवं नीति हैं।
     

हम संसारी परोक्ष-अपरोक्ष रूप से इन सब की प्राप्ति ही तो चाहते हैं जिन्हें प्राप्त करना भगवान् श्रीकृष्ण की शरण में रहकर शत-प्रतिशत संभव है।  श्रीमद्भगवद्गीता हमें जीवन का स्वरूप बताती है, जीवन के स्वरूप में जीना सिखाती है। सभी प्रकार के अज्ञान, भ्रम, संदेहों को नष्ट करके मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। मुक्ति का अर्थ जीवन से मुक्ति ही नहीं अपितु  जीवन में तत्वज्ञान को जानकर, समझकर , अपनाकर , माया से परे रहकर, माया से मुक्त होकर भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञानुसार कर्म करना भी मुक्ति ही है। मुक्त ( अलिप्त ) रहकर ईश्वर को साक्षी मानकर, उनके अधीन और उनके लिये कर्म करें।

श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य के कल्याण का मार्ग है।

Read More...

Achievements