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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palदिन ब दिन मृत होती संवेदनाएं...रिश्तों का रिसाव...मानवीय जज़्बातों का अभाव और अपने अह्म से ऊपर न उठ पाने की हमारी क्रियाशीलता जब कराती है हमें एकाकीपन का एहसास, तो सहज ही उठ जाती है कलम बोझिल हुए मन को हल्का करने के लिये..। कलम जो अंतरंग मित्र की भूमिका निभाती है...अभावों/तनावों में हमसे घण्टों बतियाती है...। खोलती है ये परत दर परत ह्यस होती अनुभूतियों के राज। जिन्हें बूझते ही व्याकुल हो उठता है हमारा मन और उपजने लगती हैं जीवन के कोरे कागज़ों पर मन की उथल पुथल भावनाएं कभी गद्य/ तो कभी पद्य /गीत/ कविता/ गज़ल/ कहानी तो कभी आलेख के रूप में....। कलम द्वारा उकेरे गए शब्द दर शब्द मेरे भारी मन को बिल्कुल हल्का कर देते हैं । और मैं यथार्थ की धरातल से अनुभवों के पँख लगाकर उड़ जाता हूँ उस क्षितिज की ओर जहाँ निर्मल निश्छल और सात्विक अनुभूतियों के सिवा कुछ भी नही होता...। शीतल जल के छींटे यह मेरा पहला लघुकथा संग्रह है। नागपुर, दमुआ (छिंदवाड़ा) और भोपाल मेरे कर्मक्षेत्र रहे। कार्यक्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी कलम पूरे आत्मबल के साथ मेरा साथ निभाती रही। साहित्यिक मित्रों ने अनेकों बार संकलन निकालने के लिए जोर दिया।पर समय और परिस्थितियां इस ओर कदम बढ़ाने के लिए हमेशा असहयोग ही करती दिखी। वैसे सामूहिक संग्रह चार-पांच आये, लेकिन माँग थी निजी संकलन की जो छोटी बहन नरिंदर कौर बसरा और भांजी रंजीता के निरन्तर उत्साहित करते रहने से ही संभव हो पा रहा है। इस संकलन के कवर पेज से लेकर पूरे प्रारूप को जिम्मेदारी से तैयार करने की भूमिका रंजीता जिसे हम घर में रूबी के नाम से पुकारते हैं ने ही निभाई है। यह कहना अतिश्योक्ति नही होगी कि यह संग्रह उसकी एकल मेहनत का परिणाम है।
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चरनजीत सिंह कुकरेजा
नाम-चरनजीत सिंह कुकरेजा
पिताजी-स.गुरुबचन सिंह कुकरेजा
माताजी-हरबंस कौर कुकरेजा
जन्मतिथि-21/3/1953
जन्मस्थान-अमृतसर(पंजाब)
शिक्षा-10 वीं तक
प्रारंभिक शिक्षा इटारसी में
फिर नागपुर में
सम्प्रति--व्यवसाय,फिलहाल रिटायर्ड -किन्तु टायर्ड नही...
कर्मभूमि-नागपुर और छिंदवाड़ा होते हुए भोपाल तक
भाषा ज्ञान-गुरमुखी(पंजाबी),हिंदी और मराठी के साथ कामचलाऊ अंग्रेजी..
शौक-साहित्य सृजन,चित्रकारी,अभिनय और पठन-पाठन और समाज सेवा
साहित्य विधा-गीत,कविता,दोहे,निबंध,कहानी और लघुकथा
लेखन और प्रकाशन 1978 से निरन्तर
उपलब्धियां----
नागपुर में मराठी रंगमंच पर अभिनय का अवसर
नागपुर और छिंदवाड़ा आकाशवाणी से रचनाओं का समय-समय पर प्रसारण
प्रकाशन--
नवभारत, लोकमत समाचार,युगधर्म ,दैनिक भास्कर,जागरण ,पत्रिका,लोकोत्तर भोपाल,युवा प्रवर्तक ,और लघु पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं के प्रकाशन का सिलसिला यथावत जारी है।
साहित्यिक संस्थाओं में प्रतिभागिकता--
कला स्वानंद,नागपुर
कन्हान साहित्य परिषद, दमुआ,जिला छिंदवाड़ा
कला मंदिर, भोपाल
प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल
निर्दलीय ,भोपाल
भोजपाल साहित्य परिषद,भोपाल
अखिल भारतीय साहित्य परिषद,भोपाल
लघुकथा शोध केंद्र,भोपाल
विश्व मैत्री मंच,भोपाल
वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच , भोपाल
बाल साहित्य शोध केंद्र
सत्य की मशाल,भोपाल
दुष्यन्त कुमार पांडुलिपि संग्राहलय,भोपाल
निर्भया साहित्यिक संस्था,भोपाल
सँयुक्त संकलनों रचनाओं का प्रकाशन ।
नागपुर छिंदवाड़ा और भोपाल की प्रतिष्ठित साहित्यक संस्थाओं से मिले सम्मान चिन्हों के माध्यम से छोटी छोटी खुशियों ने निरन्तर सृजनशील रहने के लिए प्रेरित किया। एम्स हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनो के लिए चाय नाश्ता और भोजन उपलब्ध करवाने वाली संस्था ‘बाबा नानक प्रेरणा सेवा समिति’ के सेवाकार्यो में सक्रिय भूमिका का निर्वहन।
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