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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palप्रस्तुत पुस्तक में मैंने चाहा है कि जीवन के हर पहलू को दर्शा सकूं। एक तरह जहां किसानों की अपनी स्थिति है वहीं दूसरी ओर महिलाओं का व्यथित जीवन।
एक ओर जहां आधुनिक भारत दिखाई देता है वहीं विरासत से भरपूर भारत की छटा भी सबका मन मोह लेती है।
भारत एक विशाल परिकल्पना है विशाल शाखाओं और सहस्त्र विचारधाराओं से परिपूर्ण इसे केवल एक पुस्तक में समेट लेना सूरज के आगे दीया जलाने के समान है हजारों ग्रंथ भी भारत की गाथा को संपूर्ण करने में असमर्थ है I
अनेकों बोली, अनेकों सभ्यताओं, अनेकों दृष्टिकोण से जुड़ा भारत सदैव ही अपने में अनोखी चीजें समेटे सब को अपनी और आकर्षित करता ही रहा है और सदैव करता ही रहेगा I
इस प्रस्तुत पुस्तक “भारतीय समाज का आईना ” में जीवन के कुछ ऐसे पहलुओं को लेकर कलम चली है जो भारत के किसी न किसी पक्ष का प्रतिबिम्ब है।
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आशा पाल
“आशा पाल” जो कि एक बंगाली परिवार से संबंध रखती है परंतु हिंदी, और हिंदी साहित्य के प्रति उनके लगाव ने उन्हें हिंदी में ही एम॰ ए॰ करने के लिए प्रेरित किया। हिंदी के प्रति रूझान पैदा करने और पथ प्रदर्शन करने का श्रेय उनकी माध्यमिक हिंदी अध्यापिका को जाता है ।
वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिन्दी और एडुकेशन में स्नातकोत्तर करने के साथ -साथ शिक्षा जगत से जुड़ी।
कॉलेज के दिनों में ही उनकी रचनाएँ प्रकाशित होने लगी थीं।
भाषा अध्यापन के तहत ही विभिन्न रचनाकारों से भी परिचित हुई। उनकी रचनाएं और कुछ नहीं बस उनके मन के कुछ भाव हैं, जो अनायास ही प्रवाहित हो उठते हैं।
कहा जाता कि 'साहित्य समाज का आईना है' विभिन्न परिस्थितियां, व्यवहार, संबंध ही रचनाकार के रचना की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं ।
इस प्रस्तुत पुस्तक में उन्होंने अपने सह लेखकों के साथ मिलकर भारत की कुछ खूबियों, परिस्थितियों, आचार- विचार, रीति- रिवाजों और कुरीतियों से सम्बन्धित रचनाओं को सबके समक्ष रखा है।
“भारतीय समाज का आईना” आशा है यह अपने उद्देश्य में खरा उतरेगा।
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