Share this book with your friends

Vasudev Duryodhan Sanvaad / वासुदेव दुर्योधन संवाद

Author Name: Smt. Kumari Rupa | Format: Hardcover | Genre : Poetry | Other Details

मुख्य कथा के साथ अनेक उप कथाओं को साथ लिए बहती हुई इस काव्य धारा को ‘खंड -काव्य’ कहना ही अति उचित होगा; जिसका रोमांचक पक्ष है कवयित्री द्वारा कल्पना की उड़ान का पारसत्व भाव ; जो दुर्योधन् जैसे भ्रष्ट चरित्र को सोना-सोना कर जाने को अधीर हो उठा है। जैसे—उसके नए आवरण में कसने को कहे गए वाक्य ---उसके हृदय में भी अपने पूर्वजों द्वारा किये गए अनाचार की व्यथा है । इसकी पुष्टि में कवयित्री श्री कृष्ण से भी कहलवा गई हैं, हे कुरुराज / जो मौत तुम्हें तुझे मिल रही है / वह युधिष्ठिर अर्जुन भी न पायेंगे । साहित्य में शील निरूपण का यह उपक्रम नया नहीं है। इतिहास में कभी श्री महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की “उर्मिला विषयक उदासीनता” निबंध ने भी हलचल मचाई थी । फलस्वरूप उपेक्षिता उर्मिला पर साहित्य लिखने वाले गुलों की बाढ़ सी हो आई । हो सकता है ,कभी किसी द्विवेदी जी का दिल इस पात्र के लिए भी धड़क उठे, जिसका आगाज रूपाजी ने कर दिया है ।

इस रचना के विषय के रूप में गंगा का धरती पर आने का कारण, सत्यवती की उत्पत्ति, राजा शांतनु से विवाह, द्रौपदी के पूर्व जन्म की कथा, द्रौपदी का वस्त्र हरण नहीं कर पाने का कारण कृष्ण नहीं, स्वयं धर्मराज ही थे, धृतराष्ट्र का जन्मांध होने का कारण, कर्ण अर्जुन के प्रतिद्वंद्विता का कारण, भीष्म और अष्ट वसुओं की कथा, गांधारी आँख रहते भी क्यों अपने सौ पुत्रों का मुख नहीं देख पाई, इत्यादि विषय को कारण सहित प्रकाश में लाने का प्रयास है । अभिमन्यु का वध कृष्ण के होने के बावजूद भी क्यों हुआ? भीम के पौत्र बर्बरीक का कृष्ण के हाथों वध ,इन सारी ही घटनाओं का वर्णन यहाँ कृष्ण ने दुर्योधन के प्रश्न के उत्तर स्वरूप दिया है । अर्जुन कृष्ण का भक्त था, कर्ण भी कृष्ण का भक्त था, फिर भी कृष्ण सदा अर्जुन के ही साथ रहते थे – क्यों ?

Read More...
Hardcover

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book

Delivery

Item is available at

Enter pincode for exact delivery dates

Also Available On

श्रीमती कुमारी रूपा

‘वासुदेव दुर्योधन संवाद’ नामक खंड-काव्य की रचयिता श्रीमती कुमारी रूपा दास ,पति स्वर्गीय श्री विनय कुमार दास ग्राम, ओड़य, जानकीपुर  बांका बिहार । इन्होंने 69 वर्ष की उम्र में ‘अंगिका राम चरित मानस’ जैसे महाकाव्य की रचना कर इतिहास बनाया, जिसका लोकार्पण अयोध्या में श्री राम जन्म भूमि पूजन के ठीक एक दिन पूर्व दिल्ली में किया गया । इसके विषय में कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है। हर वर्ग के लोगों के द्वारा इस महाकाव्य का स्वागत हुआ । इस पुस्तक को भारत सरकार का स्वायत्तताधिकार  भी मिल चुका है । इनकी दूसरी पुस्तक ‘नरायणम्’ की भी पाठकों द्वारा खूब सराहना हुई ।श्रीमती  दास ने महामहिम राज्यपाल आरिफ़ मुहम्मद खान साहब ,बिहार, को अपनी सभी पुस्तक भेंट करते हुए ‘नरायणम’ को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की भी अपील की । तीसरी पुस्तक जिसका नाम ‘एक मुट्ठी शब्द’ कहा गया है ,जो निश्चय ही पाठकों के लिए बेमिसाल रही है। यह कुछ कविताओं हिंदी और अंगिका दोनों की और साथ कुछ बेहतरीन कहानियों का संग्रह है, और सभी जीवन से जगत तक की सशक्त व्याख्या से पूर्ण । 

जन्म तिथि- 28.11.1954 
शैक्षणिक योग्यता- दो बार स्नातकोत्तर की डिग्री । 
माता- स्वर्गीया श्रीमती अन्नपूर्णा देवी 
पिता- स्वर्गीय श्री विजय कृष्ण घोष 
स्थायी पता- ओड़य जानकीपुर ,बांका ,बिहार। 
फोन- +91-9920834410, 
ईमेल- kumarirupadas@gmail.com 

Read More...

Achievements

+4 more
View All