बातों ही बातों में
By Miss k.p (Komal prajapati) in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,301 | लाइक: 1
बातों ही बातों में जिंदगी चलती जा रही हैं न जाने क्यों राहों में मुश्किलें ही मुश्किलें बढती जा रही हैं  मुश्किलो  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 7,2020 05:53 PM
Enigmatic lady(புதிரான பெண்).
By Theodur Rayan in Crime | वाचलं गेलेलं: 1,301 | लाइक: 1
  Hi chellam hurry up, time to school.  Chellam’s mother called her many times. Mom was busy at her job saying she would get up before sunrise in the morning. As soon as she was thinking about telling her the dream of the night, she said, "Hurry up and hurry up."  Chellama drin  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 28,2020 08:00 AM
Marx2020
By subash in General Literary | वाचलं गेलेलं: 1,301 | लाइक: 1
"அவரது பெயர் காலங்கள் தோறும் நிலைத்து நிற்கும்" லண்டன் ஹைகேட்டில் 1883 மார்ச் 17 காரல் மார்க்ஸின் பூத உடலின் முன் ந  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 5,2020 03:25 PM
Divine Play
By Sanjeev Gargish in Mystery | वाचलं गेलेलं: 1,298 | लाइक: 0
In Hindu scriptures, the words "Lila" and "Maya"(illusions) have been used frequently. "Lila" loosely means a "divine play".    I have gathered that this world is nothing but a Great Play, directed and scripted by the Supreme.     Through His powerful "Maya", He creates the   आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Mar 23,2020 09:42 AM
जनता Curfew
By Kashish Mahtani in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,298 | लाइक: 0
आज की जनता कर्फ़्यू में भाग ले रहे हैं सभी, अपने देश के स्वास्थ्य की ख़ातिर एकजुट हुए अमीर-ग़रीब   मोदी जी जो कह रहें   आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Mar 26,2020 01:05 AM
என்னவளே
By Gopinath Samikkannu in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,297 | लाइक: 0
என்னவளே  ஓ தென்றலே  கொஞ்சம் மெதுவாக வீசு  என்னவள் வருகிறாள் …   ஓ மலரே  என்னவளிடம் கடனாக  பெற்றாயோ  உ  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Mar 23,2020 03:54 AM
हम दो हमारे दो
By Purnendu Ghosh in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,297 | लाइक: 0
हम दो हमारे दो   हम दो हमारे दो हम चार रहते थे एक फुटपाथ पर हर रोज़ डंडा खाकर भी चारो रोज़ लाते थे साथ  खाते थे बचा ख  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 12,2020 12:29 AM
They who don’t know what they have....
By sameer pant in True Story | वाचलं गेलेलं: 1,295 | लाइक: 2
They who don't realize what they have...  It was a sunny Monday afternoon and the sun God must have gone crazy that day. As I drove to a lunch appointment, I could feel the heat passing through the windscreen and literally blistering my arms and face. Even with the car air conditionin  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Jun 13,2020 03:56 PM
मां बच्चे का निर्मल नाता
By Chandni in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,293 | लाइक: 1
मां बच्चे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता, मां का दर्जा सबसे ऊपर, इससे बढ़कर कुछ नहीं।। नौ महीने कोख में रखकर, सार  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 7,2020 10:23 PM
பேருந்தின் ஜென்னல் ஓர பயணம்
By dhayalan . V in General Literary | वाचलं गेलेलं: 1,291 | लाइक: 3
பேருந்தின் ஜென்னல் ஓர பயணம் நம்மில் பலர் பேருந்தில் பயணம் செய்துகொண்டிருக்கிறோம்… அப்படி பயணம் செய்யும் ப  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 13,2020 10:46 PM
Bread
By Eleena Sanyal Banerji in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,287 | लाइक: 10
The sun shone bright on the railway track The gravel grey and dry  This path would take us home very soon No one could now deny They shoved the breads inside their shirts I did the same with mine My child and man, all those that starved We would eat them all next time Weary of the hot, long wal  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 17,2020 11:40 AM
पाजिटीव है
By Dr Varun Kumar Upadhyay in True Story | वाचलं गेलेलं: 1,287 | लाइक: 3
अभी आंखे खुली ही थी की वो हड़बड़ाहट देख मैं सहम सा गया। जैसे ही दरवाजा खोला तो भीड़ सीढ़ी के  ओर जा रही थी         आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Aug 2,2020 06:30 AM
बनारस
By Abhishek Singh in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,286 | लाइक: 1
प्रिये.. जब मैं प्रेम से थक जाऊंगा तब मैं उसी अस्सी में मिलूंगा जहाँ तुलसी ने रचा था महाकाव्य, और हमनें बनाये थे प्रे  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Mar 22,2020 06:48 PM
जिंदगी
By preetibala in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,285 | लाइक: 0
जिन्दगी उस वक्त बडी मुश्किल हो जाती है जब कोई भी आपकी सुनने वाला नहीं होता सब सिर्फ आपको सुनाने वाले होते हैं... और तब  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Jun 11,2020 08:26 PM
शाम
By Shantanoo Mishra in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,284 | लाइक: 0
शाम के कोने से धीमी आवाज़ ने दस्तक दी ढलते सूरज में नई खुशबू सी फैली समय का मन रुकने का हो रहा है पंछियों को यही मंज़र क  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 26,2020 05:15 PM